ग्लोबल आर्थिक संकट का असर भारत सहित दूसरी अर्थव्यवस्थाओं को मिलने वाली कर्ज की राशि पर पड़ सकता है।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुताबिक मौजूदा आर्थिक चुनौतियां ऐसी हैं, जहां निवेश के मुकाबले रिटर्न उम्मीद के मुताबिक नहीं आ पा रहा है। ऐसे में बैंक के लिए पुराने स्तर के बराबर कर्ज देना काफी चुनौती पूर्ण है।
एडीबी के इस संकेत से साफ है कि भारत, चीन जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए कर्ज की राशि जुटाना आने वाले दिनों में आसान नहीं रहने वाला है।
एशियाई विकास बैंक ने साल 2012 में कुल 10 अरब डॉलर के कर्ज दिए हैं। इस अवधि में भारत को 2.4 अरब डॉलर की राशि कर्ज के रूप में मिली है।
बृहस्पतिवार को एशियाई विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की 46 वीं वार्षिक बैठक में बैंक के अध्यक्ष ताकेहिको नकाओ ने कहा कि मौजूदा समय काफी चुनौती भरा है।
इस समय हमारे पास मौजूदा स्तर से ज्यादा कर्ज देने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है। जो निवेश किए गए हैं, उनमें अनुमान के मुताबिक रिटर्न नहीं आ रहा है। बैंक जो पहले 5-6 अरब डॉलर तक कर्ज देता था, वह अब 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
मौजूदा परिदृश्य में इस स्तर से ज्यादा कर्ज देना काफी चुनौती भरा है। भारत के बारे में नकाओ ने कहा कि बैंक से सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले देशों में से भारत एक है। साल 2012 में भारत को 2.4 अरब डॉलर कर्ज मिला है।
भारत के कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जैसे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हाईवे, रेलवे जिन्हें कर्ज देने पर बैंक का जोर आगे भी रहेगा। नकाओ के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र का विकास करना बेहद जरूरी है, जिसकी वजह से आर्थिक विकास में तेजी लाने के साथ-साथ गरीबी पर भी लगाम लगाई जा सकती है।
एशियाई देशों को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब आठ खरब डॉलर की जरूरत है। इस जरूरत को पाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी काफी अहम है।
भारत की विकास दर बेहतर
एडीबी बैंक अध्यक्ष के अनुसार मौजूदा आर्थिक सुस्ती के समय में भारत, चीन सहित एशियाई देश विकसित देशों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसकी प्रमुख वजह इन देशों में घरेलू मांग होना है। यही नहीं, एशियाई देशों की अग्रणी भूमिका अभी जारी रहेगी।
ब्रिक्स बैंक से नहीं बदलेगा मॉडल
भारत, रूस, ब्राजील, चीन और दक्षिण अफ्रीका देशों द्वारा बनाया गया ब्रिक्स संघ इस समय अपनी पूंजीगत जरूरतों के लिए ब्रिक्स बैंक बनाने की कवायद कर रहा है।
इस कवायद पर प्रतिक्रिया देते हुए एडीबी के अध्यक्ष नकाओ ने कहा कि बैंक का स्वागत है, पर यह बात भी स्पष्ट है कि यदि बैंक मूर्त रूप लेता है, तो एडीबी उसकी वजह से अपने बिजनेस मॉडल में कोई बदलाव नहीं करेगा।