नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनी सरकार के आर्थिक विकास को गति देने के लिए सुधार प्रक्रिया में तेजी लाने की उम्मीद में भारत में कारोबारी धारणा में काफी मजबूती आई है।
शोध सलाह देने वाली एजेंसी ग्रांट थार्नटन की इंटरनेशनल बिजनेस रिपोर्ट (आईबीआर) के मुताबिक इस वर्ष की दूसरी तिमाही में देश में कारोबारी भरोसे का स्तर 86 फीसदी पर रहा। इसके साथ ही इस मामले में भारत दुनिया में प्रथम स्थान पर पहुंच गया। आईबीआर के अनुसार कारोबारी भरोसे का ग्लोबल औसत 46 फीसदी रहा।
रिपोर्ट के अनुसार केंद्र की नई सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने को अपने एजेंडे में शामिल किया है। सरकार ने देश में कारोबारी धारणा को मजबूत करने के लिए समावेशी विकास, नियामक सुधार और पारदर्शी नीतिगत माहौल तैयार करने का वादा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 93 फीसदी कारोबारियों ने आय में बढ़ोतरी की और 90 फीसदी ने मुनाफे में वृद्धि की उम्मीद जताई है। इसके साथ ही 76 फीसदी कंपनियों ने अगले एक वर्ष में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देने, 37 फीसदी कारोबारियों ने नए कारोबार में निवेश करने और 41 फीसदी ने संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश करने की बात कही है।
रिपोर्ट में कारोबारी धारणा को बाधित करने वाले कुछ अवरोधकों को भी रेखांकित किया गया है। जैसे कि 62 फीसदी कारोबारियों ने वित्त के अभाव की बात कही है। इसी तरह से 71 फीसदी कारोबारियों ने देश में कडे़ नियमों को बड़ी बाधा बताया है।
इसके साथ ही 59 फीसदी का मानना है कि कुशल कर्मचारियों की कमी है। परिवहन की समस्या, ईंधन की कीमत में हो रही बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी गिरावट को 52 फीसदी कारोबारी बड़ी चुनौती के रूप में देखते हैं।
रिपोर्ट में 54 फीसदी कंपनियों को अगले एक वर्ष में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होने, 51 फीसदी को बिक्री बढ़ने, 45 फीसदी को उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलने और 32 फीसदी को नए उत्पाद पेश करने की उम्मीद है।