मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 5.6 फीसदी और 2015-16 में 6.5 फीसदी पहुंच सकती है। रेटिंग एजेंसी फिच ने बुधवार को कहा कि राजनीतिक स्थिरता और निवेश का माहौल मजबूत होने से ऐसा होने की उम्मीद है।
फिच के मुताबिक नई सरकार ने नीतियां लागू करनी शुरू कर दी हैं और इससे नौकरशाही की काम करने की क्षमता में सुधार के साथ निवेश के लिए माहौल बेहतर होगा।
रेटिंग एजेंसी ने अपने ग्लोबल इकोनामिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2015 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ 5.6 फीसदी तक पहुंच सकती है और वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2017 में यह 6.5 फीसदी तक हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में नई सरकार आने के बाद से राजनीतिक अस्थिरता खत्म हो चुकी है। ऐसे में निवेश बढ़ने की संभावना है। रिजर्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 5.5 फीसदी और 2015-16 में जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
पिछले दो वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से कम रही है। 2012-13 में जीडीपी ग्रोथ 4.5 फीसदी और 2013-14 में यह 4.7 फीसदी रही थी।
फिच का कहना है कि जीडीपी ग्रोथ को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए शासन, उत्पाद और श्रम बाजार से जुड़े सुधार कर उत्पादकता को बढ़ाना होगा।
एजेंसी का कहना है कि ब्रिक्स देशों में भारत अकेला ऐसा देश है, जहां 2014 में जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी और कारोबारी माहौल बेहतर होने की उम्मीद के कारण 2015 में ग्रोथ में और तेजी आएगी।