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सरकार ने घटाया आर्थिक वृद्धि का अनुमान

Mon, 17 Dec 2012 11:51 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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विकास दर और राजकोषीय घाटे दोनों ही मोर्चों पर सरकार बजट अनुमानों से मात खा गई है। सोमवार को संसद में पेश मध्यावधि आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 5.7 से 5.9 फीसदी के बीच रहेगी, जबकि बजट में 7.6 फीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया गया था।
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सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.3 फीसदी तक सीमित रखने की कोशिश करेगी, जबकि बजट अनुमानों में यह लक्ष्य 5.1 फीसदी तय किया गया था। इस साल टैक्स वसूली में भी हल्की गिरावट आ सकती है जबकि व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। मौजूदा आर्थिक स्थितियों के लिए सरकार ने वैश्विक मंदी, औद्योगिक उत्पादन में कमी, सब्सिडी के बढ़ते बोझ और विनिवेश योजनाओं पर मंदी की मार को जिम्मेदार माना है।

सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि में कमी का सिलसिला अब थमेगा और दूसरे छमाही में वृद्धि दर 6 फीसदी के आसपास पहुंच सकती है। उल्लेखनीय है कि इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में जीडीपी वृद्धि सिर्फ 5.4 फीसदी रही थी।
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आर्थिक समीक्षा के अनुसार, दूसरी छमाही में अधिकांश सेवा क्षेत्रों खासकर व्यापार, परिवहन, संचार और वित्तीय सेवाओं में अच्छी वृद्धि होगी। इस साल रबी की फसल बेहतर होने से कृषि उत्पादन में सुधार की उम्मीद है। बढ़ते व्यापार घाटे के लिए सरकार ने पेट्रोलियम और सोने के आयात और वैश्विक मंदी की वजह से निर्यात में कमी को वजह माना है। फिर भी सरकार को भरोसा है कि इस साल व्यापार घाटा पिछले साल से बहुत ज्यादा अधिक नहीं बढ़ेगा।

वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा द्वारा लोकसभा में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 5.7-5.9 की विकास दर हासिल करने के लिए निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-12 में वृद्धि दर गत नौ वर्षों में सबसे कम 6.5 फीसदी रही थी। सरकार को भले ही इस वर्ष 7.6 फीसदी विकास दर हासिल करने का भरोसा था, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुमान को घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है। चालू वित्त वर्ष में टैक्स वसूली में भी हल्की गिरावट आने का अनुमान है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के संकेत दे रही है। हालांकि, सरकार अर्थव्यवस्था की मौजूदा विकास दर से संतुष्ट नहीं है। उनका मानना है कि राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.3 फीसदी तक सीमित रखना मुश्किल होगा। उधर,  प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करना संभव है।

काबू में आ सकती है महंगाई
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, अगले कुछ महीनों में महंगाई काबू में आ सकती है। मार्च के आखिर तक महंगाई घटकर 6.8 से 7 फीसदी के बीच रहने उम्मीद है। आर्थिक मंदी का असर अब कम होता दिख रहा है और दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था ऊंची विकास दर की ओर बढ़ सकती है। रघुराम राजन ने भी माना है कि दूसरी छमाही में महंगाई का दबाव कुछ कम होने की उम्मीद की जा सकती है।
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