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खाद्य सुरक्षा पर भारत को मिला संयुक्त राष्ट्र का साथ

Mon, 04 Aug 2014 09:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करने वाले भारत को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन मिला है। कृषि विकास के क्षेत्र में काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इकाई आईएफएडी ने कहा है कि अपने लोगों के लिए भोजन सुनिश्चित करना दूसरे देशों में नौकरियां पैदा करने से ज्यादा अहम है।
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इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के प्रेसीडेंट कनायो न्वान्जे ने कहा कि अगर किसी देश में लोग भूखे हों, तो दूसरे देश के लिए नौकरियां पैदा करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि अहम बात यह है कि प्रत्येक सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करे। उन्होंने यह बात डब्ल्यूटीओ में भारत के रुख के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कही।

उनके विचारों से सहमति जताते हुए आईएफएडी के भारत के कंट्री डायरेक्टर निजेल ब्रेट ने कहा कि भारत के पास अपने लोगों को भोजन उपलब्ध कराने का बड़ा काम है। ऐसे में सरकार को अपने लोगों के भरण पोषण के लिए जरूरी हर कदम उठाना होगा। भारत ने पिछले सप्ताह डब्ल्यूटीओ के ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट (टीएफए) को मंजूरी न देने का फैसला किया है।
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भारत खाद्य सुरक्षा के मसले का समाधान चाहता है। भारत ने अपने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने और गरीबों को सस्ती दरों पर अनाज मुहैया कराने के लिए डब्ल्यूटीओ से कृषि सब्सिडी की गणना करने के नियमों में बदलाव करने को कहा है। डब्ल्यूटीओ के मौजूदा नियम खाद्य सब्सिडी को अनाज के उत्पादन की कुल कीमत के 10 फीसदी पर सीमित करता है।

भारत इस बात को लेकर चिंतित है कि खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम पूरी तरह से लागू करने पर वह 10 फीसदी सब्सिडी सीमा को पार कर सकता है। इस सीमा का उल्लंघन करने पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। न्वांजे भारत की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए हैं।

इस अवधि में वे वित्त मंत्री अरुण जेटली और ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी सहित कई मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। आईएफएडी संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है। इससे विकासशील देशों में खाद्यान्न उत्पादन के लिए कृषि विकास परियोजनाओं को वित्तीय मदद मुहैया करने के मकसद से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान के तौर पर स्थापित किया गया था।
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