विमानन कंपनियों द्वारा सस्ते में सफर कराने की तमाम पेशकश के बावजूद देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में कमी आना चौंकाने वाली खबर है।
वैश्विक विमानन कंपनियों की संस्था आईएटीए के मुताबिक गत फरवरी माह में भारत के घरेलू हवाई यातायात में 9 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। जबकि, इस अधिक के दौरान घरेलू उड़ानों में औसतन करीब एक तिहाई सीटें खाली रहीं।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में भारत का घरेलू यातायात पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 9.1 फीसदी घटा है।
यह गिरावट उस वक्त आई है, जब वैश्विक स्तर पर हवाई यात्रियों की मांग में 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आईएटीए का कहना है कि फरवरी में भारत में कुल पैसेंजर लोड फैक्टर घटकर 74.5 फीसदी पर आ गया। यानी, इस दौरान भारत में एक हवाई जहाज में औसतन 74.5 फीसदी सीटें ही भर पाई।
आईएटीए का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के अलावा भारतीय विमानन कंपनियां पहले की तुलना में अपनी क्षमता कम कर रही हैं। फरवरी में कंपनियों ने अपनी क्षमता में 7.5 फीसदी की कमी की है। वैश्विक स्तर पर हवाई यात्रियों की बढ़ती मांग को देखें, तो भारत के घरेलू हवाई यातायात में गिरावट एक अपवाद दिखाई पड़ता है।
वैश्विक स्तर खासकर विकसित हो रहे देशों में मजबूत होते कारोबारी भरोसे की बदौलत हवाई यात्रा की मांग में तेजी आ रही है। पिछले अक्तूबर से अब तक वैश्विक स्तर पर यात्रियों की मांग में सालाना 9 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई है। यह 2012 के पहले नौ महीनों की तुलना में करीब दोगुना है।