देश के निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां बांग्लादेश में पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए काफी इच्छुक हैं। अदाणी समूह, शापूरजी पालोनजी और रिलायंस पावर जैसी कंपनियों ने बांग्लादेश में कोयला आधारित, एलएनजी और गैस आधारित पावर प्रोजेक्ट लगाने का प्रस्ताव दिया है। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार आगे और मजबूत होगा।
सरकार के सूत्रों का कहना है कि भारत बांग्लादेश सरकार को इस बारे में पहले ही जानकारी दे चुका है और वहां बड़े पैमाने पर निवेश को इच्छुक भारतीय निजी कंपनियों के साथ सहयोग करने की अपील की है। रिलायंस पावर, अदाणी समूह और शापूरजी पालोनजी जैसी भारतीय कंपनियों ने बांग्लादेश में पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न प्रस्ताव दिए हैं।
अनिल अंबानी की रिलायंस पावर ने एलएनजी आधारित पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं अदाणी समूह ने बांग्लादेश सरकार के साथ 60:40 के साझा उद्यम में 1,600 मेगावाट के कोयला आधारित संयंत्र का प्रस्ताव सौंपा है। भारत सरकार ने बांग्लादेश सरकार से इन कंपनियों द्वारा दिए गए प्रस्ताव की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
शापूरजी पालोनजी समूह ने बांग्लादेश के भोला में 225 मेगावाट का गैस आधारित कम्बाइन सायकिल पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस तरह देखा जाए तो भारत सरकार ने बांग्लादेश से वहां भारी निवेश करने को इच्छुक भारतीय निजी कंपनियों के लिए अनुकूल स्थितियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस संबंध में ऊर्जा मंत्रालय ने बीएचईएल के मामले को सामने रखा है जो बांग्लादेश में प्रचलित पूर्व योग्यता कानून (प्री-क्वालीफिकेशन लॉ) के चलते प्रोजेक्ट विकसित करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराने में सक्षम नहीं है। बांग्लादेश के प्री-क्वालीफिकेशन कानून के मुताबिक किसी भी अंतरराष्ट्रीय बोलीकर्ता के लिए अपने मूल देश में कम से कम 350 मेगावाट के एक पावर प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन जरूरी है। इस कानून के चलते बीएचईएल और अन्य दूसरी भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में पावर प्रोजेक्ट के लिए अपात्र हो गईं।
इसके मद्देनजर ऊर्जा मंत्रालय बांग्लादेश सरकार को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि बीएचईएल, अदाणी समूह, रिलायंस, जीएमआर, एस्सार जैसी भारतीय कंपनियों को भारत में पावर प्लांट चलाने का अनुभव है और वह प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित कंपनियां हैं।
वहीं, बांग्लादेश नेपाल और भूटान में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में भारत के साथ भागीदारी करने की इच्छा जता चुका है। भारत भी इस संबंध में परस्पर सहयोग को इच्छुक है और यह संदेश दे रहा है कि वह सब-रिजलन सहयोग के लिए वह हमेशा तैयार है। इस संबंध में ऊर्जा मंत्रालय भी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए बांग्लादेश को भागीदार बनाने के विचार कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि मेघालय के मुख्यमंत्री बांग्लादेश को राज्य में पावर प्रोजेक्ट की स्थापना में भागीदारी के लिए बांग्लादेश को आमंत्रित कर चुके हैं। बांग्लादेश ने भी इस संबंध में इच्छा जताई लेकिन उसने अभी कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया है। इसके अलावा भारत सरकार भी तिपाईमुख प्रोजेक्ट में भागीदारी के लिए बांग्लादेश को प्रस्ताव दे चुकी है।
इसी तरह, भारत सरकार कोल आधारित कैप्टिव पावर प्लांट के लिए भारत-बांग्लादेश के साझा उद्यम को एक कोयला ब्लॉक आवंटित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस तरह के पावर प्लांट से उत्पादित बिजली दोनों राज्यों के बीच साझा की जा सकती है। बिजली का उत्पादन सरकारी या निजी कंपनियों द्वारा किया जा सकता है।