वित्त सचिव अरविंद मायाराम ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को उसकी क्षमता के मुताबिक प्रोत्साहन देने के लिए यदि विदेशी संसाधनों की जरूरत होगी तो भारत एफआईआई की जगह एफडीआई रूट को तरजीह देगा।
पिछले दो वित्त वर्ष से भारत की विकास दर 5 फीसदी से नीचे बनी हुई है।
मायाराम ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 8 फीसदी की वृद्धि दर से बढ़ने की क्षमता है। इसे हासिल करने के लिए हमें संसाधनों को विकसित करना होगा और इसे हम घरेलू स्तर पर ही सृजित नहीं कर सकते हैं, हमें बाहरी स्रोतों को विकसित करना पड़ेगा।
यदि बाहरी देशों से संसाधन आते हैं, तो हम विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) की जगह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को तरजीह देते हैं।
वित्त वर्ष 2012-13 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 4.5 फीसदी था, जो पिछले एक दशक की सबसे कम रहा। 2013-14 में जीडीपी की वृद्धि दर 4.7 फीसदी दर्ज की गई। रिजर्व बैंक ने 2014-15 के लिए विकास दर 5 से 6 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया है।
भारत के लिए विदेशी निवेश को काफी अहम माना जाता है। मार्च 2017 तक विकास दर को प्रोत्साहित करने के लिए बंदरगाह, हवाई अड्डे और राजमार्ग जैसे ढांचागत परियोजनाओं के मद में अनुमानत 10 खरब डॉलर के विदेशी निवेश की जरूरत होगी। विदेशी निवेश में गिरावट से देश के भुगतान संतुलन और रुपये पर प्रतिकूल असर हो सकता है।
वित्त वर्ष 2013-14 में देश में कुल विदेशी निवेश 8 फीसदी बढ़कर 24.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2012-13 में 22.42 अरब डॉलर पर था।
भविष्य में विदेशी निवेश और आकर्षित करने के लिए सरकार की योजना रक्षा, रेलवे और निर्माण गतिविधियों जैसे सेक्टरों में एफडीआई नीति में छूट देने की है।