नेपाल में पनबिजली, सिंचाई एवं ढांचागत संरचना से संबंधित परियोजनाओं के लिए भारत 1 अरब डॉलर की सहायता उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक्जिम बैंक को सौंपी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले महीने हुई नेपाल यात्रा के दौरान इस बारे में भारत और नेपाल सरकार के बीच समझौता हुआ था। इस समझौते पर नेपाल सरकार की तरफ से वहां के वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव मधु कुमार मरासिनी और भारत सरकार की तरफ से एक्जिम बैंक के उप प्रबंध निदेशक डेविड रसकिन्हा ने बीते 25 नवंबर को हस्ताक्षर किया था। इस अवसर पर मोदी के अलावा नेपाली प्रधानमंत्री सुशील कुमार कोइराला भी उपस्थित थे।
नेपाल को विभिन्न परियोजनाओं के लिए भारत की तरफ से लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी भारत सरकार की तरफ से एक्जिम बैंक दो लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध करा चुका है। तीनों लाइन ऑफ क्रेडिट को देखें तो इसके तहत कुल 1.35 अरब डॉलर की राशि दी जा चुकी है।
पहला लाइन ऑफ क्रेडिट 10 करोड़ डॉलर का था जो सड़क, ग्रामीण विद्युतीकरण, बिजली ट्रांसमिशन और पनबिजली की परियोजनाओं के लिए मिला था। दूसरा लाइन ऑफ क्रेडिट 25 करोड़ डॉलर का था जो राजमार्ग, हवाई अड्डा, पुल, सिंचाई, सड़क और रेल मार्ग से संबंधित परियोजनाओं के लिए था। पहला लाइन ऑफ क्रेडिट सितंबर 2007 और दूसरा अक्तूबर 2011 में दिया गया था।
अभी जो लाइन ऑफ क्रेडिट दी गई है, उसके तहत भारतीय निर्यातकों को वहां भेजी गई सामग्री के मूल्य के बराबर राशि का भुगतान किया जाएगा। नेपाल पर बाध्यता होगी कि इस राशि से वह भारत से ही सामान खरीदे।
उल्लेखनीय है कि नेपाल की सीमा कहीं से भी समुद्र से नहीं मिलती। भारत से नेपाल का पुराना संबंध है इसलिए वह काफी हद तक भारतीय सामग्री का ही उपयोग करता है। भारत से वहां पेट्रोलियम उत्पाद, प्राथमिक और सेमी फिनिश्ड स्टील, परिवहन के साजोसामान, अनाज, मशीनरी, प्लास्टिक के सामान आदि की नियमित आपूर्ति की जाती है।