वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत और चीन विश्व अर्थव्यवस्था को रफ्तार देंगे। भारत में 2013-14 के दौरान आर्थिक विकास दर 6.7 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और फैकल्टी को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि आने वाले वर्षों में भी भारत और चीन विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को रफ्तार देंगे।
‘पूर्व के उदय का विश्व अर्थव्यवस्था के लिए निहितार्थ’ विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 2013 से 2014 के बीच भारत की वृद्धि 6.1-6.7 फीसदी और चीन की वृद्धि 8.0-8.5 फीसदी रहने की संभावना है।
चिदंबरम विदेशी निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश के प्रति आकर्षित करने के लिए अमेरिका की यात्रा पर हैं। उन्होंने माना कि पूरब के देशों के बीच संसाधनों और बाजारों के लिए होड़ में ‘तनाव की संभावना’ है।
उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में द्वीपों, जल के नीचे के संसाधनों या खुद जल के लिए विवाद की स्थिति दिखाई दी है। हमें इन तनावों को कम करने के लिए मिलजुल कर कार्य करना होगा। जिससे कि निजी हितों से ऊपर उठकर व्यापार, निवेश और पारस्परिक लाभ को प्रोत्साहित किया जा सके।
चिदंबरम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अर्थिक मंदी ने दुनिया को समायोजन के लिए विवश किया है और इसमें औद्योगिक देशों को इस समय अधिक बचत करने जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक खर्च करने की आवश्यकता है।
इस तरह के समायोजन उपायों से औद्योगिक देशों को अपनी भारी-भरकम कर्ज का भार करम करने में मदद मिलेगी। वहीं, उभरती अर्थव्यवस्था से कम होती वैश्विक मांग को प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि संभवत: चीन को उपभोग बढ़ाने और भारत को निवेश खर्च में बढ़ोतरी किए जाने की आवश्यकता है। चीन की निवेश कहानी पर बहुत अधिक चर्चा हो चुकी है, अब भारत की कहानी शुरू हो रही है।
चिदंबरम ने कहा कि निवेश की मांग में कमी के चलते भारत की बचत दर प्रभावित हो रही है। भारत की बचत दर हाल के वर्षों में सबसे कम जीडीपी का करीब 30 फीसदी पर आ गई थी।