टेलीकॉम कमीशन ने 4जी लाइसेंस हासिल कर चुकी टेलीकॉम कंपनियों को कॉल सेवाएं प्रदान करने के लिए मंजूरी दे दी है। यह कंपनियां अतिरिक्त फीस के तौर पर 1,658 करोड़ रुपये चुकाकर कॉल सेवाएं भी मुहैया करा सकेंगी। माना जा रहा है कि इससे सबसे ज्यादा फायदा मुकेश अंबानी समूह की टेलीकॉम कंपनी को मिलेगा। सिर्फ इसी के पास पूरे देश में ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्लूए) का लाइसेंस है। यह फैसला हाई स्पीड इंटरनेट सेवाएं की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
मंगलवार को टेलीकॉम कमीशन की बैठक बाद टेलीकॉम सचिव आर. चंद्रशेखर ने बताया कि कमीशन ने सुझाव को मान लिया है कि बीडब्लूए ऑपरेटर अगर चाहें तो यूनिफाइड लाइसेंस के तहत 1,658 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फीस भरकर वॉयस सेवाएं दे सकते हैं। विभागीय समिति की इस सिफारिश से कमीशन मोटे तौर पर सहमत है।
गौरतलब है कि मुकेश अंबानी समूह के रिलायंस जियो इंफोकॉम के अलावा भारती एयरटेल, एयरसेल, क्वालकॉम, तिकोन डिजिटल और एक अन्य कंपनी के पास 4जी ब्रॉडबैंड लाइसेंस हैं। इसमें एयरटेल और एयरसेल के पास यूनिफाइड सर्विस लाइसेंस है, जिसके तहत वह 4जी के साथ वॉयस सेवाएं भी दे सकती हैं। जबकि, बाकी कंपनियां सिर्फ 4जी इंटरनेट सेवाएं मुहैया करा सकती हैं।
सरकार के इस फैसले से 4जी के साथ टेलीकॉम क्षेत्र में धमाकेदार एंट्री की तैयारी कर रहे मुकेश अंबानी समूह की योजनाएं परवान चढ़ सकती हैं। लेकिन इस मुद्दे पर सरकार को यूनिफाइड सर्विस लाइसेंस रखने वाले ऑपरेटरों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
देश में मोबाइल क्रांति के बाद अब टेलीकॉम जगत की नजरें ब्रॉडबैंड सेवाओं पर हैं। टेलीकॉम क्षेत्र में भारी निवेश कर चुका मुकेश अंबानी समूह अपनी 4जी सेवाएं लांच करने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहा है। बीडब्लूए ऑपरेटरों को कॉल सेवाओं की छूट मिलने के बाद अब 4जी के दौर की शुरुआत हो सकती है।
नक्सल क्षेत्रों में लगेंगे 2,199 टावर
टेलीकॉम कमीशन ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में टेलीकॉम सेवाओं के विस्तार पर 3 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इससे इन क्षेत्रों में 2,199 टेलीफोन टावर लगाएं जाएंगे। कमीशन ने टेलीफोन टावर लगाने वाली कंपनियों पर लाइसेंस की बाध्यता लागू करने के मामले को फिलहाल टाल दिया है। टेलीकॉम रेगुलेटर (ट्राई) ने इन कंपनियों से 8 फीसदी लाइसेंस फीस वसूलने और विदेशी हिस्सेदारी घटाकर 74 करने की सिफारिश की थी।