मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देशभर में करोड़ों छात्रों को दोपहर में दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं आने देने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने राज्यों को आश्वस्त किया है कि एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के कारण आने वाली अतिरिक्त लागत की प्रतिपूर्ति के संबंध में जल्द फैसला लिया जाएगा।
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राज्यों को भेजे गए पत्र में आश्वस्त किया गया है कि मिड-डे मील को तैयार करने में एलपीजी की बढ़ी कीमतों के कारण आने वाले अतिरिक्त खर्च की वित्त मंत्रालय से मांग की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में मंत्रालय से अतिरिक्त राशि की स्वीकृति हासिल हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि देशभर में मिड मील तैयार करने में बड़े पैमाने पर एलपीजी सिलेंडर का प्रयोग हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा एलपीजी सिलेंडर का कोटा तय करने के साथ ही अतिरिक्त सिलेंडर मार्केट रेट पर बिक्री किए जाने के बाद मिड डे मील योजना में ईंधन मद में 653 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार अचानक बढ़ गया है। कुछ समय पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मिड-डे मील योजना को कोटा से मुक्त कर सस्ती दर पर सिलेंडर दिए जाने की मांग की थी किंतु पेट्रोलियम मंत्रालय ने पिछले महीने उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
गैस की बढ़ी कीमतों के भुगतान को लेकर संशय में फंसे राज्यों में मिड-डे मील उपलब्ध कराने वाली एजेंसियां कई स्थानों पर खाने की आपूर्ति रोकने लगी थीं। मंत्रालय ने राज्यों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि ईंधन मद में अतिरिक्त खर्च की प्रतिपूर्ति की जाएगी। मंत्रालय ने अभी स्पष्ट नहीं किया है कि योजना के अनुरूप केंद्र की ओर से अतिरिक्त खर्च का केवल 75 फीसदी ही दिया जाएगा या पूरा भुगतान मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि चूंकि राज्यों में बजट का पहले से ही संकट है ऐसे में बीच सत्र में अतिरिक्त भार को केंद्र सरकार को ही पूरा वहन करना चाहिए। वित्त मंत्रालय से कब तक अतिरिक्त धनराशि की स्वीकृत मिलेगी अभी स्पष्ट नहीं है।