कमरतोड़ महंगाई की मार अब सरकार के आंकड़ों से साफ दिखने लगी है। अक्टूबर में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 8 महीने में सबसे ज्यादा 12.56 फीसदी बढ़ी जबकि खुदरा महंगाई 7 महीने में पहली बार 10 फीसदी के पार चली गई है।
खाद्य सुरक्षा के दावों के दौर में सब्जियों पर करीब 46 फीसदी महंगाई है और अनाज व इससे बनी चीजों के दाम 12 फीसदी बढ़ गए हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में शामिल वस्तुओं में सिर्फ चीनी के दाम पिछले साल की तुलना में घटे हैं। सितंबर में खुदरा महंगाई 9.84 फीसदी थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 10.09 फीसदी तक पहुंच गई है।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के दौरान शहरों में खुदरा महंगाई 10.20 और ग्रामीण इलाकों में 10.11 फीसदी बढ़ी है।
इस साल फरवरी में खुदरा महंगाई दर 10.91 फीसदी तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके बाद महंगाई दर 10 फीसदी से नीचे आ गई। लेकिन पिछले कई महीनों से सब्जियों व खाने-पीने की दूसरी वस्तुओं की महंगाई ने खुदरा मुद्रास्फीति को 10.09 पर पहुंचा दिया है।
इस दौरान फल 12.84 फीसदी, अंडा-मांस व मछली 11.78 फीसदी और दुग्ध उत्पाद 7.78 फीसदी महंगे हो गए हैं। सिर्फ चीनी की कीमतों में थोड़ी राहत मिली है। चीनी के दाम पिछले साल की तुलना में 5.46 फीसदी कम हैं।
खाने-पीने की चीजों पर 12.56 फीसदी की महंगाई गत फरवरी के बाद सबसे ज्यादा है। इसके अलावा कपड़ों व जूतों के दाम 9.18 फीसदी, ईंधन के दाम करीब 7 फीसदी और गैर-अल्कोहलिक पेय के दाम 8.76 फीसदी बढ़े हैं। दाल और खाद्य तेलों ने थोड़ी राहत दी है। इन पर एक फीसदी से भी कम महंगाई है।
10 फीसदी से ज्यादा महंगाई चिंताजनक: रंगराजन
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने 10 फीसदी से ज्यादा खुदरा महंगाई दर को चिंताजनक बताते हुए इसके लिए खाद्य मुद्रास्फीति को जिम्मेदार ठहराया है।
उनका कहना है कि मौद्रिक नीति का एक अहम मकसद कीमतों को काबू में रखना है। माना जा रहा है कि महंगाई के चलते सस्ते कर्ज की उम्मीद को झटका लगा है।