आखिरकर आयकर विभाग ने दशकों बाद डिफाल्टरों की सूची फिर से जारी करना शुरू कर दिया है। शुरूआत १० करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स नहीं भरने वाले व्यक्ति/फर्मों से हुई है, जिसमें १८ बकाएदारों के नाम हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर बकाएदार या तो लापता हैं या फिर उनके पास उतनी संपत्ति नहीं है जिसे जब्त करने से आयकर विभाग को रकम मिल जाए। दिलचस्प बात यह है कि सूची के १८ नाम से ११ (६३.६ फीसदी) नाम गुजरात के हैं।
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने आयकर विभाग को पिछले सप्ताह ही इस सूची को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था और इसी का पालन करते हुए इसे सार्वजनिक कर दिया गया है। फिलहाल जो सूची जारी की गई है उनमें १० करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि के बकाएदारों के नाम शामिल हैं। सूची में पहले स्थान पर अहमदाबाद के ब्ल्यू इंफोर्मेशन टेक्रोलोजी लिमिटेड का नाम है जिसके ऊपर ७५ करोड़ रुपये से ज्यादा राशि बकाया है। इसके निदेशकों- दिलीप कुमार पुरी, डी. सीमा झावेरी और एम. मिलन त्रिवेदी का नाम है और इस कंपनी ने असेसमेंट वर्ष १९९५-९६, १९९६-९७, १९९७-९८ और १९९९-२००० के दौरान कार का भुगतान नहीं किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी के इन निदेशकों को आयकर विभाग के अधिकारी ढूंढने में नाकाम रहे हैं और इन्हें लापता घोषित कर दिया है।
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दशकों पहले इस तरह की सूची बनायी जाती थी और इसे सार्वजनिक भी की जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में इस परंपरा पर विराम लग गया था। अब एक बार फिर से सूची बना कर सार्वजनिक करने से बकाएदारों पर अप्रत्यक्ष दवाब तो बनेगा ही। उनके मुताबिक फिलहाल १० करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया रखने वाले वैसे बकायेदारों की सूची जारी की गई है जो कि या तो लापता हैं या उन्होंने खुद को संपत्तिविहीन दिखा रखा है। इस सूची के सार्वजनिक होने से उन पर सामाजिक दवाब पड़ेगा।
सूची में अहमदाबाद के लक्ष्मीनारायण ठक्कर का भी नाम है जो कि हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) है और इसने भी कहा है उनके पास कर जमा करने के लिए संपत्ति नहीं है। इसमें एक मृत व्यक्ति का भी नाम है जिसके पुत्र से अपेक्षा की गई है कि वह कर चुकाये। अधिकारियों का कहना है कि बकायेदारों से तत्काल कर चुकाने को कहा गया है।