डिस्कवरी चैनल को अमेरिकी सेना और भारतीय सेना की इकाइयों के बीच एक संयुक्त प्रशिक्षण एक्सरसाइट तक विशिष्ट पहुंच हासिल हुई है।
सोमवार 23 फरवरी को रात 9 बजे अपने इस विशेष कार्यक्रम युद्ध अभ्यास: गुरखाज एंड आर्कटिक वुल्स में डिस्कवरी चैनल दोनों सेनाआें की अभी तक गोपनीय बनी रही दुनिया पर नजर डाल रहा है।
दोनों सेनाएं 21 वीं सदी की लगातार और पेचीदा हुई चुनौतियों का सामना करने के लिए मिल कर तैयार कर रहीं हैं। भारतीय सेना की नौवीं गोरखा राइफल्स की दूसरी बटालियन और अमेरिकी सेना की आर्कटिक वुल्वस, दोनों का एक ही लक्ष्य है। पूरी दुनिया में भारत और अमेरिका के हितों को बचाना और आतंक के खिलाफ एक मजबूत बल का गठन करना।
गढ़वाल हिमालय में चौबटिया (उत्तराखंड) नामक गांव के निकट अमेरिकी सेना की आर्कटिक वुल्व्स नामक टुकड़ी केयरबैक्स, अलास्का से पहुंचती है, ताकि गोरखा रायफल्स के साथ वार्षिक भारत-अमेरिका संयुक्त मिलिट्री एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास कर सकें।
इस कार्यक्रम के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए साउथ एशिया, डिस्कवरी नेटवर्क्स एशिया पैसिफिक के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट और जनरल मैनेजर राहुल जौहरी ने कहा कि डिस्कवरी चैनल पहली बार अपने दर्शकोें को भारतीय और अमेरिकी सेनाओं की एक मिली-जुली ट्रेनिंग एक्सरसाइज वाल एक अनूठा मिशन दिखा रहा है।
युद्ध अभ्यास गुरखाज एंड आर्कटिक वुल्व्स कार्यक्रम सशस्त्र बलों द्वारा अपनाई जाने वाली युद्धक नीति, तकनीकों और रणनीति पर नई रोशनी डालता है। इसका मकसद यह है कि दोनों सेनाएं एक दूसरे के साथ अपनी महारत को साझा कर सकें।
डिस्कवरी चैनल के कैमरे दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास को रिकार्ड करते हैं, जिसके दौरान ये टुकड़ियां अपनी युद्ध संबंधी और तकनीकी क्षमताओं को निखारती हैं। ये अभ्यास तीन चरणों में बंटे हुए हैं। इंटर-ऑपरेबिलिटी, शारीरिक और हथियार प्रशिक्षण।