बैंकों की बिगड़ती हालत को देखते हुए अब सरकार सख्त नियम बनाने की कवायद कर रही है। इसके लिए वित्त मंत्रालय एक सख्त कानून लाने की तैयारी में हैं, जिसके जरिए जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले बड़े ग्राहकों पर सख्ती की जा सके।
इसके अलावा बैंकों के लिए पूंजी जुटाने के विकल्प क्या हो सकते हैं, इसकी भी वित्तीय सेवा मामलों का विभाग कवायद कर रहा है। इसी के मद्देनजर मंगलवार को वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा मामलों के सचिव जी.एस.संधू ने देश के प्रमुख सरकारी बैंकों के मुखिया के साथ बैठक की है।
बैठक में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आदि के प्रमुख शामिल थे।
बैंकों की हिस्सेदारी होगी कम?
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को हुई बैठक में नायक पैनल रिपोर्ट के तहत बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कम करने को लेकर भी चर्चा की गई है।
जिसके तहत देश के दो प्रमुख सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में सरकार की हिस्सेदारी पर भी चर्चा हुई है। दोनों बैंकों में सरकार की 58.60 और 58.87 फीसदी है।
अधिकारी के अनुसार हालांकि वित्त मंत्रालय इस रूख पर कायम है कि सरकारी बैंकों में 51 फीसदी से हिस्सेदारी कम नहीं की जाएगी।
बैंक लोन देने से पहले करें विचार
इसके अलावा बैंकों से यह भी कहा गया है कि सरकार के लिए उन्हें ज्यादा पूंजी सहायता देना एक हद तक ही संभव है। ऐसे में वह शेयर बाजार से पूंजी जुटाने का विकल्प भी तलाशें।
बैंकों के बढ़ते एनपीए पर लगाम लगाने और कर्ज वसूली की प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी बैठक में चर्चा की गई है। जिसमें प्रमुख रूप से जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले ग्राहकों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं। इसके अलावा बैंकों द्वारा कर्ज देने के नए कदमों पर भी विचार किया गया है।