आर्थिक सुधार की नीतियों के विरोध में एनडीए समेत तमाम दलों के भारत बंद से देश को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के मुताबिक बृहस्पतिवार को देशव्यापी हड़ताल की वजह से करीब 12 हजार, 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। एसोचैम ने लगभग 10 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया है। यह नुकसान देश में उत्पादन और व्यापार प्रभावित होने की वजह से आंका गया है।
सीआईआई ने कहा है कि सुधार की नीतियों पर सरकार को राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए। सरकार की ओर से सुधार के उपायों की घोषणा जरूरी है। सीआईआई के अध्यक्ष एडी गोदरेज का कहना है कि आर्थिक सुधारों को अगले पायदान तक ले जाने के लिए कठोर निर्णय लेने पर आम जन को इसका कष्ट झेलना पड़ता है। 90 के दशक की शुरूआत में किये गए आर्थिक सुधार का सकारात्मक परिणाम सभी के समाने है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के सभी राजनीतिक दल आर्थिक सुधार की आवश्यकता को समझेंगे और इस ओर काम करेंगे।
उद्योग संगठन एसोचैम के महासचिव डीएस रावत का कहना है कि तमाम राजनीतिक पार्टियां जो कि आर्थिक सुधार के पक्ष में हैं, वे आम आदमी की सहायता भी कर रही हैं। संगठन का कहना है कि यह समय भारत को जगाने का है और भारत बंद जैसे प्रयास अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हैं। एसोचैम का कहना है कि इंडिया इंक व्यापारियों और छोटे दुकानदारों के बगैर पूर्ण नहीं हो सकता है।
संगठन ने व्यापारियों से अपील की, कि वे सड़कों पर इस तरह के विरोध में उतरने के बजाए समय के साथ बदलते हुए आधुनिक तरीके से अपने व्यवसाय को बढ़ाएं। गौरतलब है कि उद्योग जगत मल्टीब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश, सब्सिडी प्राप्त रसोई गैस की सीमित संख्या और डीजल की बढ़ी कीमतों के पक्ष में है। उनका मानना है कि इसका दीर्घकालिक लाभ आम आदमी को भी होगा।