एचएसबीसी बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 5.7 फीसदी कर दिया है। पहले उसने 6.2 फीसदी की विकास दर का अनुमान व्यक्त किया था। अनुमान में कटौती की वजह देश में आर्थिक सुधार संबंधी नीतिगत निर्णयों में ठहराव आने और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे ग्लोबल आर्थिक सुस्ती के प्रभाव को बताया गया है।
संसद के मानसून सत्र में दिखाई दिए भारी राजनीतिक गतिरोध के बाद एचएसबीसी ने यह कहते हुए देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर निराशा जताई है कि निकट भविष्य में देश में ढांचागत सुधारों की दिशा में कोई ठोस निर्णय होने की संभावनाएं काफी क्षीण दिख रही हैं।
इसके अलावा उसने कमजोर मानसून के चलते बारिश की कमी का बुरा असर अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने की आशंका भी जताई है। साथ ही रिपोर्ट में ग्लोबल अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती का असर भी देश के व्यापार, वित्तीय दश और कारोबारी भरोसे पर पड़ने के आसार भी जताए गए हैं।
रिपोर्ट में कारखाना क्षेत्र की खस्ता हालत पर चिंता जताई गई है और सेवा क्षेत्र की हालत में भी नरमी दिखाई देने की बात कही गई है। एचएसबीसी ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए हम चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के 6.2 फीसदी के अपने अनुमान घटाकर 5.7 फीसदी कर रहे हैं, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 के लिए अनुमान को 7.4 फीसदी से घटाकर 6.2 फीसदी किया जा रहा है। इससे पहले मॉर्गन स्टेनले भी विकास दर के अनुमान को 5.8 फीसदी से घटाकर 5.1 फीसदी कर चुका है।