फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समझदारी से करें हेल्थ इंश्योरेंस का चुनाव

विज्ञापन
विज्ञापन
बात जब हेल्थ इंश्योरेंस लेने की आती है, तो अकसर लोगों को समझ में नहीं आता कि उनके लिए कौन सा हेल्थ कवर ठीक रहेगा। अधिकतर लोग सही जानकारी के अभाव में बीमा एजेंट या किसी परिचित की सलाह पर ही करते हैं। ऐसे में कई बार वह ऐसा प्लान ले लेते हैं, जो उनके लिए उपयुक्त नहीं होता। इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त पर्याप्त सावधानी न बरतने के चलते लोगों को क्लेम सेटलमेंट के वक्त भी दिक्कतें होती हैं।
विज्ञापन

अस्पताल का खर्च और बीमा कवर

ज्यादातर लोगों को गलतफहमी रहती है कि हेल्थ इंश्योरेंस कवर अस्पताल में इलाज पर होने वाले खर्च के बराबर होता है। कंपनी की ओर से ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी मिलने पर भी लोग समझते हैं कि अब उन्हें हेल्थ कवर के लिए सोचने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को यह समझना चाहिए कि हेल्थ केयर का कॉस्ट पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई गुना बढ़ गई है। ऐसे में जरूरी नहीं कि अस्पताल में इलाज के दौरान आया खर्च आपके बीमा कवर की सीमा के भीतर हो।

इसी तरह ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अपनी कई तरह की समितताओं के चलते कई बार आपको पर्याप्त हेल्थ कवर दिलाने में नाकाफी साबित हो सकती है। इसे देखते हुए आपको अतिरिक्त हेल्थ कवर लेने के बारे में जरूर सोचना चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले उससे जुड़ी जानकारियां जुटानी चाहिए हो सके तो किसी विश्वस्त एडवाइजर से सलाह भी लेनी चाहिए। पॉलिसी लेने के लिए ऐसी कंपनी का चुनाव करना चाहिए जिसका प्रीमियम कम हो और सम इंश्योरर्ड ज्यादा हो। इसके साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि आपको कुछ खास बीमारियों पर विस्तृत कवर और ज्यादा नो-क्लेम बोनस मिल सके।

प्रीमियम के बारे में समझ लें

ग्राहकों को यह बात समझनी चाहिए बीमा कंपनियां उनसे मिलने वाले प्रीमियम पर ही अपना कारोबार चला रही हैं। इसलिए कंपनियों का प्रयास अपने दायित्वों को सीमित रखते हुए ग्राहक से अधिक प्रीमियम लेने का होता है। ऐसे में कंपनियां प्रीमियम की गणना परिवार के इतिहास, नशे या तम्बाकू सेवन और पहले से मौजूद बीमारियों आदि को देखते हुए करती हैं।

प्रीमियम की गणना ग्राहक द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है। इसलिए सही जानकारी देकर आप कम प्रीमियम भुगतान करके भी उपयुक्त हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं। कई ऐसी पॉलिसियां भी होती हैं, जिनमें बीमारी को देखते हुए बीमा कवर का भुगतान किया जाता है। ऐसे में कम प्रीमियम भरने के चक्कर में बीमारियों से जुड़ी सूचनाओं को छिपाना क्लेम सेटेलमेंट के वक्त महंगा पड़ सकता है।
विज्ञापन

जल्दी पॉलिसी लेना है फायदेमंद

अकसर युवा होने पर लोग सोचते हैं कि उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत नहीं। उम्र बढ़ने पर जब उन्हें इसकी जरूरत का अहसास होता है, तब तक उनका देय प्रीमियम काफी बढ़ जाता है। इसलिए आज के दौर में बहुत महत्वपूर्ण है कि वह बीमारी का इंतजार किए बिना, युवा अवस्था में ही कम प्रीमियम पर हेल्थ इंश्योरेंस की सुरक्षा पालिसी ली जाए, ताकि आगे चलकर परेशानी का सामना न करना पड़े।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें