यूं तो किसी देश की आर्थिक हालत का पता लगाने के लिए वहां के लोगों का रहन-सहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रोथ रेट और लोगों की कमाई देखी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि लिपस्टिक भी किसी देश की आर्थिक हालात बयां करने का पैमाना हो सकती है।
लिपस्टिक इंडेक्स किसी देश की आर्थिक स्थिति बताता है। कई रिसर्च हुई हैं जिनसे यह बात सामने आई है कि अगर किसी देश की महिलाएं कपड़े खरीदने में अधिक खर्च करती हैं तो इसका मतलब है कि उस देश की आर्थिक हालत काफी अच्छी है।
वहीं दूसरी ओर, अगर किसी देश की महिलाएं लिपस्किट अधिक खरीदती हैं तो इससे पता चलता है कि उस देश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इसका मतलब मंदी के समय में महिलाएं लिपस्टिक अधिक खरीदती हैं।
कपड़ों और जूतों पर खर्च कम
1990 के दशक में एसटी लाउडर कंपनी के चेयरमैन लियोनार्ड लाउडर ने इस इंडेक्स की शुरुआत की थी। इसके लिए उन्होंने महिलाओं के व्यवहार का भी अध्ययन किया।
दरअसल, इस इंडेक्स के पीछे तर्क यह है कि मुश्किल हालात में महिलाएं अधिक आकर्षक दिखना चाहती हैं और इसके लिए वह लिपस्टिक खरीदने में काफी पैसा खर्च करती हैं।
लिपस्टिक के अलावा मुश्किल के समय में महिलाएं कपड़े, जूते और पर्स आदि खरीदने में कम पैसे खर्च करती हैं। ऐसे में मंदी में महिलाएं लिपस्टिक खरीदने पर अधिक खर्च करती हैं।
क्या कहना है लाउडर का
लाउडर का कहना है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक अध्ययन के बाद यह पाया कि मुश्किल के समय में सस्ती लग्जरी चीजों की मांग बढ़ जाती है।
2001 में मंदी के दौरान लिपस्टिक की सेल्स में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। साथ ही, अन्य कुछ कॉस्मेटिक्स की चीजों जैसे नेल पॉलिस की सेल्स में भी बढ़त दिखाई दी।