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भारत-यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार की उम्मीदें कायम

Sat, 13 Apr 2013 01:27 AM IST
बर्लिन से आशुतोष चतुर्वेदी
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जर्मनी की तीन दिन की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को देश के लिए उड़ान भरी। लेकिन इस उड़ान से पहले दोनों देशों के बीच हुए कई समझौतों के मध्य इस बात की उम्मीदें कायम दिखाई दीं कि इस साल के अंत तक भारत-यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो जाएगा।
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इसी तरह भारत यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी को 27 देशों के यूरोपीय ब्लॉक और भारत के बीच द्विपक्षीय निवेश और व्यापार समझौते (बीआईटीए) के मुद्दे पर भी ‘सशक्त राजनयिक प्रयास’ करने के लिए मनाने में कामयाब दिख रहाहै।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल द्वारा इस यात्रा के समाप्त होने के अवसर पर जारी संयुक्त वक्तव्य में भारत-यूरोपीय संघ के बीच कामयाब और संतुलित मुक्त व्यापार समझौते के लिए व्यापक आधार तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
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इस समझौते से दोनों के बीच रोजगार और विकास के अवसर पैदा होंगे। वक्तव्य में कहा गया है कि उम्मीद है 2013 के अंत तक यह समझौता हो जाएगा। हालांकि मर्केल ने बृहस्पतिवार को यह कहने में हिचक नहीं दिखाई थी कि एफटीए के मामले में अभी भारत-यूरोप संघ को ‘अनेक व्यावहारिक दिक्कतों’ से पार पाना है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले का भारत में भाजपा विरोध कर रही है। उसकी मांग है कि ‘इस बेहद विवादास्पद मुद्दे’ को संसदीय समिति के सामने विचार के लिए रखा जाए। उल्लेखनीय है कि जर्मनी भारत पर बीमा क्षेत्र में अपने विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने और यूरोप से ऑटोमोबाइल के आयात पर शुल्क घटाने का दबाव डाल रहा है।

भाजपा का कहना है कि यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने पर भारतीय बाजार में यूरोप की कंपनियों का कब्जा हो जाएगा। यूरोप के डेयरी, पोल्ट्री, चीनी, गेहूं, कन्फेक्शनरी, तिलहन, मत्स्य और जैविक उत्पाद भारतीय बाजार में उतरेंगे। इससे भारतीय कृषि के हित प्रभावित होंगे।
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