डीजल की कीमतों में 50 पैसे की बढ़ोतरी को वापस लिए जाने से इंकार करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि रेलवे जैसे थोक उपभोक्ताओं को खुद बाजार दर पर ईंधन खरीदने के लिए अपने बजट के लिए रास्ता तलाशना होगा।
कांग्रेस चिंतन शिविर में हिस्सा लेने आए मोइली ने कहा कि बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता है। चार माह के अंतराल के बाद केंद्र सरकार ने दो दिन पहले ही डीजल की कीमतों में 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की थी। इसके साथ ही रक्षा और रेलवे जैसे थोक उपभोक्ताओं के लिए 10 रुपये की वृद्धि की। देश में डीजल की कुल बिक्री का करीब 17.77 फीसदी थोक उपभोक्ताओं को बेचा जाता है।
उल्लेखनीय है कि डीजल में दी जा रही नौ रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी को खत्म करने के लिए सरकार ने तेल कंपनियों को धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी करने की अनुमति दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने कहा कि डीजल और पेट्रोल की कीमतों को 2002 में ही भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने नियंत्रण मुक्त कर दिया था लेकिन यूपीए सरकार लगातार डीजल में सब्सिडी दे रही थी।
रेल किराया बढ़ाने के संकेत
कांग्रेस चिंतन शिविर में भाग लेने आए रेल मंत्री पवन बंसल ने रेल किराया बढ़ाने के संकेत दिए। बंसल ने डीजल दरों में बढ़ोतरी के सवाल पर मीडिया से कहा कि डीजल की कीमतें बढ़ने से रेलवे पर असर पड़ेगा। इस माहौल में रेलवे के आर्थिक हालातों की समीक्षा की जाएगी और यदि जरूरत पड़ी तो किराया बढ़ाया जा सकता है। डीजल के दाम बढ़ने से माल भाड़े पर भी असर पड़ सकता है।