आर्थिक संकट से जूझ रही एचएमटी (घड़ी) फिर से टिक-टिक करने लगेगी। भारी उद्योग मंत्रालय ने एचएमटी की रानीबाग, बंगलूरू और तुम्कुर यूनिटों को पुनर्जीवित करने के लिए हाथ बढ़ाया है।
एचएमटी और मंत्रालय के बीच अनुबंध होने के बाद न सिर्फ इन यूनिटों में उत्पादन बढ़ेगा बल्कि क र्मचारियों को हर महीने समय पर वेतन और अन्य खर्च भी मिलने लगेगा।
रानीबाग यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एचएमटी का भारी उद्योग मंत्रालय से करार होने की बात अंतिम चरण में है। अनुबंध के बाद कंपनी को 980 करोड़ रुपये मिलेंगे और इसी साल अंत तक एचएमटी की घड़ियां फिर से टिक-टिक करने लगेंगी।
उल्लेखनीय है कि एचएमटी की सभी यूनिटों में पर्याप्त मैकेनिकल स्टाफ और मशीनें हैं लेकिन घड़ियों के उत्पादन के लिए कंपनी के पास धन नहीं है। कुछ साल पहले तक जो रानीबाग यूनिट सालाना लाखों घड़ियां बनाती थी, अब वह डिमांड पर सालाना मात्र 40 हजार घड़ियां ही बना रही है।
कहां किताना स्टाफ
एचएमटी की रानीबाग यूनिट में 531, बंगलूरू में करीब 200, तुम्कुर में 396 कर्मचारी तैनात हैं। कंपनी की घड़ियों के प्रचार-प्रसार के लिए 65 कर्मचारी हैं।