वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से सरकार को टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने और राजकोषीय घाटा कम करने में मदद मिल सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। पिछले तीन साल से राजकोषीय घाटा जीडीपी के करीब 4.5 फीसदी पर बना हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक राजकोषीय घाटे को मौजूदा स्तर से स्थायी रूप से कम करने के लिए सरकार को जीडीपी के अनुपात में राजस्व बढ़ाना होगा। सरकार स्ट्रक्चरल टैक्स सुधार जैसे जीएसटी को लागू करती है, तो इससे सरकार का टैक्स रेवेन्यू बढ़ेगा। कारोबार करने की लागत कम होगी और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
रिपोर्ट का कहना है कि तमाम तरह के केंद्रीय व राज्य करों की जगह जीएसटी लागू होने से कारोबार की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और विकास दर को गति देने में मदद मिलेगी। हालांकि, रेटिंग एजेंसी का मानना है कि चालू वित्त वर्ष 2014-15 में जीएसटी लागू होने की संभावना कम है और इसके चलते राजकोषीय घाटा 4.3 फीसदी रह सकता है।
क्रिसिल का कहना है कि सामान्य से कम मानसून के चलते वित्तवर्ष 2015 में विकास दर 5.5 फीसदी रह सकती है। जबकि मूल अनुमान 6 फीसदी का था। हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने राजकोषीय घाटे के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है।