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जीडीपी के लिए आधार वर्ष 2011-12 करने की तैयारी

Tue, 09 Sep 2014 08:26 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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सरकार ने देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए आधार वर्ष 2011-12 करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार की ओर से आधार वर्ष में बदलाव से अर्थव्यवस्था का आकार और व्यापक हो जाएगा। वर्तमान में जीडीपी की गणना का आधार वर्ष 2004-05 है। सांख्यिकी मंत्रालय ने 2006 में आधार वर्ष 1993-94 से बदलकर 2004-05 किया था।
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मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत ने बताया कि हमने जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस समय अंतराल में विनिर्मित नए उत्पाद और नए आंकड़े शामिल किए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जीडीपी की गणना की कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं किया जा सकता है।

अनंत ने आधार वर्ष में बदलाव की समय सीमा के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन प्रक्रिया जल्द पूरी होने के संकेत जरूर दिए। व्यवस्था के तहत सरकार निश्चित अंतराल के बाद जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष में संशोधन करती है। जिससे कि अर्थव्यवस्था खासकर मैन्यूफैक्चरिंग में हुए बदलाव को इसमें शामिल किया जा सके।
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सकल घरेलू उत्पाद, राष्ट्रीय आमदनी, खपत व्यय और पूंजी निर्माण जैसे अर्थव्यवस्था के मानकों के आधार पर वास्तविक अर्थों में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए यह निर्धारित किया जाता है कि वस्तुओं का उत्पादन एक निश्चित वर्ष की कीमत पर हुआ है, इसे ही आधार वर्ष कहते हैं। अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक बदलाव के मद्देनजर आधार वर्ष में समय-समय पर संशोधन किया जाता है। जिससे की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर सामने रखी जा सकती है।
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