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किसान कर्ज माफी में गिर सकती है ऑडिटर्स पर गाज

Thu, 07 Mar 2013 11:13 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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किसान कर्ज माफी घोटाले में बैंक अधिकारियों के साथ खातों की जांच करने वाले ऑडिटर्स पर भी गाज गिर सकती है। महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज की निगरानी प्रणाली पर सवाल उठाए जाने के बाद अब विभाग ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है।
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सूत्रों के अनुसार विभाग ने बैंकों को कहा है कि वह योजना के तहत इस्तेमाल हुए सभी खातों की जांच करें। साथ ही अनियमितता पाए जाने पर बैंक अधिकारी के अलावा खातों की जांच करने वाले ऑडिटर्स की भी जवाबदेही तय करें।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि कृषि कर्ज माफी योजना में गड़बड़ियां की गई हैं, तो उसकी जिम्मेदारी केवल उस बैंक अधिकारी की ही नहीं है, जो कि सीधे तौर पर किसानों से जुड़ा था। यदि अनियममितताएं हैं, तो खातों की जांच करने वाले ऑडिटर्स की भी उतनी जिम्मेदारी है। ऐसे में कार्रवाई तय होने पर घोटाले में शामिल ऑडिटर्स को भी जवाबदेह बनाया जाए । इसके लिए विभाग ने बैंकों को कार्यवाही करने लिए कहा है।
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एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कर्ज माफी योजना में खातों की ऑडिंटिंग तीन स्तर पर की गई थी। इसके तहत बैंक अधिकारी द्वारा ऑडिट करने अलावा, नाबार्ड के ऑडिटर और उसके बाद बैंकों ने स्वतंत्र ऑडिटर्स से भी जांच कराई है। कर्ज माफी में अनियमितता के सवाल पर बैंक अधिकारी ने बताया कि एक महीने के अंदर करीब 3.50 करोड़ लाभार्थियों की सूची भी बनाई जानी थी, उसमें भी सरकार के तरफ से स्पष्ट निर्देश था किसी भी तरह कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से छूट न जाय।

ऐसे में इतने कम समय में पूरी कवायद की गई थी, जिसे देख्रते हुए थोड़ा-बहुत मानकों के स्तर लचीलापन हो सकता है। वित्त मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार विभाग ने इसके अलावा सभी बैंकों से हर महीने अपनी रिपोर्ट विभाग को देनी है।
 
अधिकारी के अनुसार पूरी जांच में पांच से छह महीने का समय लग सकता है। कैग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार साल 2008 में करीब 4.29 करोड़ किसानों के लिए शुरू की गई कृषि कर्ज माफी योजना में कई सारे मामलों में पात्र किसानों को कर्ज माफी का लाभ ही नहीं मिला।

इसके बदले में बैंक अधिकारियों और लाभार्थियों के सांठगांठ से ऐसे लोगों के कर्ज माफ कर दिए गए, जिन्होंने वाहन, कारोबार, दुकान, जमीन खरीदने के लिए कर्ज लिया हुआ था। पूरी योजना को देश के सभी अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों के अलावा, एक लाख प्राथमिक कृषि कोऑपरेटिव सोसाइटी, जिला सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने मिलकर पूरा किया था।
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