वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को किसी भी कीमत पर 5.3 फीसदी पर सीमित रखने की प्रतिबद्धता जताने के साथ ही कहा है कि बाजार से अतिरिक्त उधारी लेने की फिलहाल उसकी कोई योजना नहीं है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव अरविंद मायाराम ने विश्व आर्थिक मंच के भारतीय सम्मेलन में कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे को 5.3 फीसदी के लिए प्रयासरत है और किसी भी कीमत पर इसे हासिल करेगी।
सरकारी आय और व्यय के बीच के अंतर को प्रदर्शित करने वाले राजकोषीय घाटे का बढ़ता स्तर सरकार के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी राजकोषीय घाटे को सीमित दायरे में रखने की जरूरत बतायी है। हालांकि वर्ष 2012-13 के बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.1 प्रतिशत पर रखने की बात कही गयी थी लेकिन राजस्व वसूली के उम्मीद से कम रहने और सब्सिडी का बोझ बढ़ने से इसके 5.3 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान है।
राजकोषीय घाटे का बोझ कम करने के लिए सरकार ने बाजार से पांच लाख 70 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनायी हैं। अगर यह जीडीपी के 5.3 फीसदी पर पहुंचता है तो सरकार को बाजार से 20 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पडे़गी। लेकिन मायाराम ने कहा कि सरकार की बाजार से अतिरिक्त उधार लेने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी फैसला जनवरी-फरवरी 2013 में ही समीक्षा के बाद हालात को ध्यान में रखते हुये किया जाएगा।