राष्ट्रीय सोलर मिशन के तहत नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने वर्ष 2021-22 तक ग्रिड सोलर बिजली परियोजना क्षमता के लक्ष्य को 20,000 मेगावाट से बढ़ाकर एक लाख मेगावाट करने का प्रस्ताव रखा है। यानी कि एमएनआरई वर्ष 2022 तक सोलर से उत्पादित एक लाख मेगावाट बिजली की आपूर्ति ग्रिड में करना चाहता है। मंत्रालय के इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है। मंत्रालय इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार से 35,580 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता चाहता है।
प्रस्ताव के मुताबिक एक लाख मेगावाट का लक्ष्य दो तरीके से हासिल किया जाएगा। एक तरीका रूफ टॉप सोलर प्रोजेक्ट होगा, तो दूसरा तरीका काफी बड़ी सोलर परियोजना की स्थापना। रूफ टॉप परियोजना के माध्यम से ग्रिड सोलर में 40,000 मेगावाट जोड़ा जाएगा, वहीं 57,000 मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन बड़ी परियोजना के माध्यम से करने का लक्ष्य रखा गया है। 3000 मेगावाट ग्रिड सोलर की स्थापना पहले ही हो चुकी है।
एमएनआरई ने इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीन, पूंजी, कुशल श्रमिक व उत्पादित बिजली के ट्रांसमिशन की उचित व्यवस्था करने की योजना तैयार कर ली है। सोलर परियोजना की स्थापना के लिए सिर्फ जमीन अधिग्रहण करने में छह लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इसके अलावा एक लाख मेगावाट के लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी दिक्कत कुशल श्रमिकों की बताई जा रही है, क्योंकि ऊर्जा प्रबंधन में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या काफी कम है। इस लक्ष्य के रास्ते में उत्पादित बिजली का ट्रांसमिशन को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है। ग्रिड में सोलर पावर से उत्पादित बिजली को सफल तरीके से भेज पाना सरकार के लिए चुनौती हो सकता है।