हवाई ईंधन पर कर में कटौती पर आने वाले दिनों में सरकार बड़ा फैसला ले सकती है, जिसका फायदा यात्रियों को किराये में कमी के रूप में मिल सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाकात कर इस मामले पर विचार-विमर्श किया। दोनों ही मंत्रालय इस पर सहमत भी हो गए हैं। लिहाजा दोनों मिलकर अब इस बारे में वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्ताव (प्रेजेंटेशन) पेश करेंगे, क्योंकि इस पर आखिरी फैसला वित्त मंत्रालय को ही लेना है।
मोइली से मुलाकात के बाद अजित सिंह ने बताया कि दोनों के बीच हवाई ईंधन (एटीएफ) पर वर्तमान में लागू 24 फीसदी वैट की जगह तीन से चार फीसदी केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाने की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई है और मोइली इस पर राजी हैं। इस बारे फैसला वित्त मंत्रालय को करना है। दोनों मंत्रालय मिलकर वित्त मंत्रालय के सामने प्रजेंटेशन देंगे।
बढ़ते हवाई किरायों पर उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों और हवाई अड्डों के शुल्क में काफी बढ़ोतरी हुई हुई है।
ऐसे में एयरलाइंस की लागत में काफी इजाफे के चलते किरायों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार का इसे अपने नियंत्रण में लेने का कोई इरादा नहीं है। अलबत्ता सरकार चाहती है कि किराए के निर्धारण की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए। यह बात नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाकात के बाद कही। अजित सिंह ने कहा कि हम केवल इस बात का प्रयत्न कर रहे हैं कि हवाई किरायों का निर्धारण एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाए। लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि उनकी यात्रा का किराया किस आधार पर तय किया गया है और जो किराया उनसे लिया जा रहा है, वह पूरी तरह मुनासिब है।
किंगफिशर के बारे में उन्होंने कहा कि डीजीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि दोबारा उड़ान भरने की अनुमति पाने के लिए उन्हें अपने सुरक्षा व संचालन संबंधी इंतजामों और वित्तीय प्रबंधन को लेकर निदेशालय को पूरी तरह से आश्वस्त कराना होगा। उन्होंने माना कि किंगफिशर के उड़ान न भरने के चलते यात्रियों को परेशानी हो रही है, पर डीजीसीए की पहली चिंता सुरक्षा को लेकर है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसके अलावा उसे अपने कर्मचारियों, तेल कंपनियों और और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को उनके बकाये का भुगतान करना होगा।