प्याज की आसमान छूती कीमतों से भले ही आम आदमी के रसोई का बजट बिगड़ रहा हो लेकिन सरकार इसके निर्यात पर पाबंदी लगाने के पक्ष में नहीं है।
वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने प्याज की बढ़ी हुई कीमतों को अस्थायी बताते हुए कहा है कि देश में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। जनवरी और फरवरी माह में चार दिनों तक आजादपुर मंडी बंद रहने और बरसात होने के कारण इसकी कीमतें बढ़ी हैं।
हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि बिचौलियों की वजह से खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 11 रुपये प्रति किलो तक अधिक है।
राज्य सभा में एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि जनवरी और फरवरी में राजस्थान और मध्यप्रदेश में बारिश अधिक हुई थी। वहीं, जनवरी में आजादपुर मंडी भी कुछ दिन बंद थी। इन वजहों से कीमतें प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने बताया कि घरेलू खपत से अधिक प्याज होने पर ही इसे दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। प्याज का घरेलू उत्पादन लगभग 1 करोड़ 70 लाख टन है। जबकि इसकी मांग 1 करोड़ 50 लाख टन के आसपास ही है।
देश में 84 फीसदी प्याज की खपत होती है। महज 7 फीसदी प्याज का निर्यात ही विदेशों में किया जाता है। जबकि 6 फीसदी स्टोरेज में रहता है।
शर्मा ने अपने जवाब में बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जनवरी में प्याज की बढ़ी हुई कीमतों का हवाला देते हुए कृषि मंत्री को निर्यात पर पाबंदी लगाने के लिए चिट्ठी लिखी थी।
लेकिन केंद्र का पक्ष रखते हुए उन्होंने बताया कि सरकार अचानक प्याज के निर्यात पर पाबंदी नहीं लगा सकती है। उसे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना भी जरूरी है। अगर निर्यात पर पाबंदी लगाई जाएगी, तो अतंरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में प्रतिस्पर्धियों को जगह बनाने का मौका मिल जाएगा।
विगत 22 जनवरी से प्याज की कीमतों में बढ़त बनी हुई है। आजादपुर मंडी में 11 मार्च को प्याज की थोक कीमत 13 रुपये 10 पैसा प्रति किलो आंकी गई थी।