सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) में मैन्यूफैक्चरिंग की रफ्तार को बढ़ावा देने के रास्ते तलाश रही है।
इसके तहत, सरकार की एक अंतर मंत्रालयी समिति (आईएमसी) छोटे उद्योग शुरू करने और बीमार एवं खस्ताहाल इकाइयों से बाहर निकलने के नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव कर सकती है।
सरकार ने एमएसएमई सचिव माधव लाल की अध्यक्षता में छोटे उद्योगों की परेशानियां जानने और उनकी मैन्यूफैक्चरिंग को तेजी लाने के लिए एक अंतर मंत्रालयी समिति का गठन किया था।
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि समिति ने छोटी इकाइयों के वृद्धि दर को प्रभावित करने वाले तमाम मुद्दों पर चर्चा की है और वह अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट जल्द ही कैबिनेट सचिव अजीत कुमार सेठ को सौंपी जा सकती है।
रिपोर्ट में समिति की योजना लघु एवं छोटी इकाइयां शुरू करने वाले और बीमार व खस्ताहाल इकाइयों को बंद करने वाले व्यक्तियों के लिए नियमों को आसान बनाने की है। उन्होंने बताया कि कारोबारियों के लिए खस्ताहाल इकाइयों को बंद करने और नई इकाइयां शुरू करने आसान नियमों की आवश्यकता है।
फिलहाल, बीमार इकाइयां चला रहे कारोबारियों के लिए उसे बंद करना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि इसको लेकर कोई प्रभावी कानून है।