नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई केंद्र की नई सरकार ने छह दशक से भी ज्यादा पुराने आयकर कानून की जगह लेने के लिए यूपीए सरकार के कार्यकाल में तैयार प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) बिल को संसद में पारित कराने से पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करवाने की दिशा में सरकार कदम बढ़ा रही है।
वित्त राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया है कि 15वीं लोकसभा भंग होने के साथ ही वर्ष 2010 का डायरेक्टर टैक्स कोड बिल लैप्स हो चुका है।
सीतारमण ने यह जानकारी एक राज्यसभा सांसद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी, जिसमें पूछा गया था कि सरकार इस बिल के ड्राफ्ट में संशोधन करके इसे संसद की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने की इच्छुक है या नहीं?
गौरतलब है कि डीटीसी बिल को लोकसभा में 30 अगस्त 2010 को पेश किया गया था और संसद की मंजूरी के बाद इसे 1961 के आयकर अधिनियम की जगह नए कानून की जगह लागू किया जाना था। दूसरी ओर जीएसटी पर सीतारमण ने बताया कि 3 जून को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ एक बैठक की है।
बैठक में बिल पर सहमति बनाकर उसे संसद में पेश करने को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ चर्चा कर बिल से जुड़े मुद्दों को सुलझा कर इसे संसद में पेश करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि कृषि से होने वाली आय को जीएसटी कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। ऐसा संविधान की उस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार को ऐसी आय पर कर लगाने से रोका गया है।