अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार बैंकों को कर्ज पुर्नगठन के निर्देश देने पर विचार कर रही है। इसके तहत ऐसे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, जो जायज कारणों से और अपरिहार्य परिस्थितियों में रुके पड़े हैं, उनके कर्ज के पुनर्गठन संबंधी नियमों में बदलाव किया जा सकता है। जिससे कि इन परियोजनाओं को दोबारा शुरू कर हाउसिंग सेक्टर में आपूर्ति की स्थिति को सुधारा जा सके।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि नेशनल हाउसिंग बैंक के जरिए सभी बैंकों से अटके हाउसिंग प्रोजेक्टों का ब्योरा मांगा गया था। अभी तक मिले आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हैं।
इन परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने में गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) बन चुके खातों को रिवाइव करने की जरूरत है। मंत्रालय इसके तहत ऐसे एनपीए, जो कि वाजिब और अपरिहार्य कारणों से हुए हैं, साथ ही जिनसे संबंधित प्रोजेक्ट्स में क्लीयरेंस का मुद्दा नहीं हैं, उनके कर्ज का पुनर्गठन करने की संभावना तलाश रहा है।
इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक के कर्ज पुनर्गठन संबंधी नियमों में बदलाव करना होगा। अधिकारी के अनुसार 18 मार्च को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ बैंकरों की बैठक में इस संबंध में चर्चा होगी। सरकार की कोशिश यह है कि व्यावहारिक बदलाव कर इन प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू किया जाय, जिससे कि न केवल हाउसिंग सेक्टर में आपूर्ति बढ़े बल्कि कीमतों में कमी आ सके।
रिजर्व बैंक के मौजूदा कानून के मुताबिक बैंक यदि अपने किसी कर्ज के खाते को एनपीए से रोकने के लिए, कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग करता है तो उसे कर्ज की राशि का 2.75 फीसदी तक प्रोविजनिंग करना पड़ता है। जबकि कर्ज खाते का एनपीए हो जाने पर बैंकों को कर्ज की राशि का 15 फीसदी प्रोविजनिंग करना पड़ता है।
ऐसे में बैंक वित्त मंत्रालय से मांग कर चुके हैं कि अटके प्रोजेक्ट्स को दोबारा कर्ज देने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जिसके लिए उन्हें प्रोविजनिंग नियमों में भी छूट मिलनी चाहिए।