पिछले वर्षों के रिटर्न के आधार पर सेवा कर चोरी के मामलों की छानबीन में सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। अकेले दिल्ली क्षेत्र में पिछले दो महीनों के दौरान करीब 183 करोड़ रुपये की सेवा कर चोरी के मामले पकड़ में आए हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में कंपनियों ने ग्राहकों से सेवा कर वसूला लेकिन विभाग को जमा नहीं कराया। ऐसा करने वालों में सबसे अधिक संख्या रीयल एस्टेट डेवलपरों, मैनपावर मुहैया कराने वाली फर्मों और होटलों की हैं।
सेवा कर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गत दिसंबर से विभाग ने पिछले वर्षों के रिटर्न का डेटाबेस खंगालना शुरू किया और जिन मामलों में बड़ा हेरफेर दिखा, उनकी पड़ताल शुरू की। इस कवायद से अकेले दिल्ली क्षेत्र में 183 करोड़ रुपये की सेवा कर चोरी के मामले पकड़ में आए हैं। देशभर में यह आंकड़ा हजार करोड़ से ऊपर है। दिल्ली में 183 करोड़ रुपये में करीब 90 करोड़ रुपये की वसूली विभाग कर चुका है।
सूत्रों का कहना है कि एक बड़ी एयरलाइंस की करीब 25 करोड़ रुपये की सेवा कर चोरी भी विभाग ने पकड़ी है। इस एयरलाइंस ने यात्रियों से सेवा कर वसूलने के बावजूद सरकार को जमा नहीं कराया था। गौरतलब है कि सेवा कर की दर में दो फीसदी की बढ़ोतरी और वसूली अभियान में तेजी से चलते चालू वित्त वर्ष में सेवा कर संग्रह करीब 32 फीसदी बढ़ा है। उत्पाद और सीमा शुल्क में उम्मीद से कम रही वृद्धि की भरपाई भी सरकार सेवा कर के जरिए करने की कोशिश कर रही है।