अपने विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने विमान बनाने वाली सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एरोनॉटिकल्स लिमिटेड (एचएएल) में अपने 10 फीसदी शेयर बेचने को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने एचएएल में सरकार की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी में से 10 फीसदी शेयर बेचने को मंजूरी दे दी है।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि सरकारी शेयरों की बिक्री इक्विटी बाजार में कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाकर की जाएगी। आईपीओ अगले वित्त वर्ष में लाया जाएगा। फिलहाल गैर सूचीबद्ध श्रेणी की इस कंsपनी की चुकता पूंजी 31 मार्च तक 120.5 करोड़ रुपये की है।
एचएएल के विनिवेश का प्रस्ताव कंपनी के आधुनिकीकरण के लिए अगले पांच सालों में 20 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना के तहत सीसीईए के समक्ष पेश किया गया है। सरकार ने कंपनी के पुनर्गठन के लिए पूर्व कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की है, जिसकी रिपोर्ट सौंपे जाने का इंतजार है।
एचएएल मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के लिए विमानों और उपकरणों का निर्माण करती है। एचएएल द्वारा विकसित विमानों में हल्का लड़ाकू विमान तेजस, ध्रुव हेलीकॉप्टर सहित रूसी लड़ाकू विमान सुखोई-30 का घरेलू संस्करण शामिल है।