फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंकों को बिजनेस कॉरस्पाडेंट रखने की छूट

Thu, 14 Mar 2013 11:47 PM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
नकद सब्सिडी स्कीम योजना की शुरुआत में मिले झटके के बाद अब सरकार सतर्क हो गई है। अगले चरणों में योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार अब बिजनेस कॉरस्पॉडेंट रखने के नियमों में बदलाव कर रही है।
विज्ञापन


नए निर्देशों के तहत बैंकों को बिजनेस कॉरस्पाडेंट खुद रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने बैंकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में बैंकों के साथ बैठक में यह बात सामने आई है कि कई बिजनेस कॉरस्पॉडेंट एजेंट के रूप में काम कर रही निजी कंपनियों ने खाते खोलने में अनियमितता की है। इसी को देखते हुए बैंकों ने यह मांग की थी कि उन्हें बिजनेस कॉरस्पॉडेंट रखने में खुद निर्णय लेने की छूट दी जाए।

बैंकों का ढांचा तैयार न होने से सरकार की नकद में सब्सिडी देने की योजना शुरुआत में ही झटके खा गई। एक जनवरी 2013 से शुरू हुई नकद सब्सिडी स्कीम केवल सात योजनाओं के जरिए 20 जिलों में ही शुरू हो पाई थी। जबकि सरकार की 43 जिलों में इसे शुरू करने की योजना थी।
विज्ञापन


साथ ही उसके जरिए सभी तरह की सब्सिडी लाभार्थी को देने की तैयारी थी। इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह न होने की प्रमुख वजह निजी कंपनियां रही थीं, जो कि बिजनेस कॉरस्पाडेंट एजेंट के रूप में बैंकों के लिए काम कर रही हैं।

बैंकों के अनुसार, आरबीआई के मुताबिक निजी कंपनियों को भी बिजनेस कॉरस्पॉडेंट एजेंट बनाया जा सकता है। इसी के तहत देश को 20 क्षेत्रों में बांटकर निजी कंपनियों को बोली के लिए टेंडर जारी किया गया था। जिसके तहत सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों को ठेका दिया गया।

कंपनियों ने बिना पूंजी की व्यवस्था किए काम के लिए नियुक्तियां की और कोई ढांचा भी नहीं तैयार किया। यही नहीं बैंकों के पास इस तरह की भी शिकायतें आई कि कई कंपनियां नियुक्ति के लिए कर्मचारियों से 1-2 लाख रुपये ले रही हैं। जिसके बाद कंपनियों को ब्लैक लिस्ट भी किया गया है।

अब जबकि सरकार नकद सब्सिडी स्कीम (जिसे वह अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर कहती है) पूरे देश में लागू करना चाहती है। आगे होने वाली गड़बड़ियों से बचने के लिए वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वह खुद ही कंपनी का चुनाव कर सकते हैं, या फिर बैंक खुद अपने बिजनेस कॉरस्पाडेंट बना सकते हैं। ताकि तय समय पर आधारभूत ढांचा तैयार हो सके।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें