सरकार इस कदम के जरिए खास तौर से छोटे निवशकों के हितों की रक्षा करना चाहती है। शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सरकार नए कानून बनाने के संबंध में सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करना शुरू कर चुकी है। इसके पहले माइक्रोफाइनेंस डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन बिल 2012 पर गठित संसद की स्थायी समिति फरवरी 2014 में अपनी रिपोर्ट पेश कर चुकी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि नया कानून बनाने से पहले सरकार को राज्यों और सभी संबंधित पक्षों से वृहद स्तर पर बात करनी चाहिए। चौंदहवीं लोकसभा में बिल पारित न होने के बाद अब माइक्रोफाइनेंस बिल सरकार को नए सिर से पेश करना होगा।
आंध्र प्रदेश में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद से उनके लिए नए कानून की बात यूपीए-2 के कार्यकाल में शुरू हुई थी। जिसके तहत उनकी ऊंची ब्याज दरों पर लगाम कसने आदि की प्रमुख मांग थी। इसी के बाद आरबीआई ने नियमों में बदलाव कर कई तरह की सख्ती की थी।