केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने कहा है कि सरकार देश में विदेशों से चीनी की आवक नियंत्रित करने के लिए चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है। थामस के मुताबिक, चीनी पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 20 फीसदी किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार की योजना रॉ शुगर (गैर रिफाइन चीनी) पर आयात शुल्क हटाने की भी है। फिलहाल, चीनी और रॉ शुगर प्रत्येक पर आयात शुल्क 10 फीसदी है।
थॉमस ने बताया कि सरकार के सामने दो अलग-अलग प्रस्ताव आए हैं। पहला, सफेद चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 20 फीसदी करने का है। जबकि दूसरा, रॉ शुगर पर आयात शुल्क घटाकर शून्य फीसदी किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। हम इन दोनों प्रस्तावों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले पर जल्द ही निर्णय किया जाएगा। मंत्रियों से विचार विमर्श करने के बाद अगले 10-15 दिन में एक कैबिनेट नोट जारी कर दिया जाएगा।
थॉमस ने बताया कि रॉ शुगर पर आयात शुल्क हटाना आवश्यक है। इससे आयातित कच्ची चीनी को घरेलू बाजार में रिफाइन किया जा सकेगा, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। रॉ शुगर पर आयात शुल्क हटाने के मुद्दे पर इंडियन चीनी मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने अमर उजाला को बताया कि अभी देश में पर्याप्त चीनी है। ऐसे में रॉ शुगर पर आयात शुल्क हटाना इंडस्ट्री के लिए घातक हो सकता है। इसका कीमतों पर असर पड़ेगा और किसानों व इंडस्ट्री को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
चीनी निर्यात के मुद्दे पर थॉमस ने बताया कि चालू विपणन वर्ष 2012-13 में मुक्त चीनी निर्यात नीति इस माह से प्रभावी हो गई है और यह आगे भी जारी रहेगी। मालूम हो कि मई में ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के अंतर्गत चीनी निर्यात केवल सितंबर तक किया जा सकता है। इस साल देश में चीनी उत्पादन 2.6 करोड़ टन होने का अनुमान है। यह 2.2 करोड़ टन की सालाना मांग से अधिक है।