वित्त मंत्रालय इस संबंध मेंं वित्त मंत्री अरूण जेटली को एक स्पेशल कोर्ट के गठन की योजना को पेश कर चुका है। जिसके तहत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज न चुकाने वाले बड़े डिफॉल्टर की फास्ट ट्रैक आधार पर सुनवाई होगी।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि हमने बड़े डिफॉल्टरों से कर्ज वसूली के लिए एक नए कानून को बनाने का प्रस्ताव दिया है। जिसमें मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने के प्रावधान के साथ, कड़ी पेनॉल्टी लगाने की बात कही गई है। अधिकारी के अनुसार इस कवायद का प्रमुख मकसद जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले बड़े डिफॉल्टर पर शिकंजा कसना है।
टॉप ५०डिफॉल्टर ने 40 हजार करोड़ रुपये का नही चुकाया कर्जअधिकारी के मुताबिक स्पेशल कोर्ट में केवल बड़े लोन डिफॉल्टर के मामले आएंगे। मसलन 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन डिफॉल्ट करने वाले मामलो की सुनवाई ही केवल स्पेशल कोर्ट में की जाएगी। इस स्पेेशल कोर्ट का दर्जा मौजूदा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल से उपर रखने की योजना है। यानी स्पेशल कोर्ट से आगे की अपील उच्च न्यायालय में की जा सकेगी।
ऑल इंडिया बैंक इम्पलॉयज एसोसिएशन के अनुसार देश में 406 ऐसे डिफॉल्टर हैं जिनकी बैंकोंं के कुल डूबे कर्ज में करीब 35-40 फीसदी हिस्सेदारी है। इन 406 डिफॉल्टरों पर 70 हजार करोड़ रुपये की देनदारी है। जबकि पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री का 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज डूब (एनपीए) बन चुका है। बैंकर्स के अनुसार सख्त कानून न होने से बड़े कर्ज वसूलने में खास तौर से दिक्कत आती है। ऐसे में अगर मजबूत कानून बनता है, तो निश्चित तौर पर कर्ज की रिकवरी आसान हो सकेगी।