एक तरफ सरकार एटीएम के जरिए पैसे का निकालने पर शुल्क लगाने की योजना बना रही है। वहीं एटीएम लगाने की योजना में पिछड़ गई है।
आम चुनावों से पहले नए एटीएम लगाने में बैंकों की सुस्ती सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। इसका असर सरकार द्वारा लोगों के खाते में सीधे तौर पर पहुंचाए जाने वाली सब्सिडी योजना पर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय को इस बात का डर है कि अगर लोगों तक एटीएम की पहुंच नहीं होगी, तो बैंक खातों में सब्सिडी पहुंचाए जाने की योजना पर प्रतिकूल असर होगा। इसे देखते हुए अब सभी सरकारी बैंकों को मार्च 2014 तक नए एटीएम लगाने का ब्योरा हर महीने वित्त मंत्रालय को देना होगा।
वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी बैंकों को लिखे गए पत्र के अनुसार मार्च 2014 तक बैंकों को कुल 34,688 शाखाओं पर एटीएम लगाने हैं। बैंकों द्वारा वित्त मंत्रालय को दी गई जानकारी के अनुसार अक्तूबर 2013 तक केवल 9,533 एटीएम लगे हैं, जो कि लक्ष्य से काफी कम है। वित्त मंत्रालय ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों और विदेशी बैंकों का हर शाखा पर एटीएम लगाने का अनुपात कहीं बेहतर है। वित्त मंत्रालय के अनुसार मार्च 2013 तक सरकारी बैंकों का शाखा पर एटीएम लगाने का अनुपात 0.96 है, जबकि निजी बैंकों का 2.78 और विदेशी बैंकों का 3.8 है।
धीमी प्रगति की वजह के बारे में एक सरकारी बैंक के अधिकारी का कहना है कि छोटे शहरों और कस्बों में एटीएम लगाने की लागत ज्यादा होने के साथ-साथ उसके रख-रखाव की लागत भी ज्यादा है। इसे देखते हुए अभी बैंक तेजी से विस्तार नहीं कर पाए है। बैंक वित्त मंत्रालय द्वारा ऑन साइट एटीएम लगाने के लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उसमें आपूर्ति आदि की सभी समस्या आती रही है। इसका असर नए एटीएम लगाने पर पड़ा है।