सरकार ने इसके तहत कृषि बीमा का दायरा बढ़ाने की कवायद शरू कर दी है। जिससे कि सूखे की स्थिति में किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। कृषि बीमा के तहत किसानों को कम बारिश से फसलों को होने वाले नुकसान, राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम के तहत फसलों का बीमा, रबी सीजन की फसलों के लिए बीमा आदि के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।सूखे के खतरे को देखते हुए सरकार ने शुरू की कवायदसूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा मामलों के विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाल में बैठक की है। जिसके तहत कमजोर मानसून को देखते हुए सूखे से निपटने की तैयारी पर चर्चा की गई है। इसमें फसलों को होने वाले नुकसान पर भी विचार-विमर्श किया गया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बैठक में खास तौर से कृषि बीमा योजनाओं की समीक्षा की गई है। जिससे कि किसानों को उनके फसल के नुकसान होने पर बीमा के जरिए बेहतर तरीके से सुरक्षा मिल सके। अधिकारी के अनुसार बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मौजूदा पैमाने को किस तरह से लागू किया जाय, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग दायरे में आ सके ।
एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के ताजा आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय कृषि बीमा स्कीम के तहत साल 1999 से खरीफ सीजन 2013 के तहत जून 2014 तक 21 करोड़ से ज्यादा किसान इसके दायरे में आ चुके हैं। इसी तरह मौसत आधारित बीमा स्कीम जिसे साल 2007 में शुरू किया गया था, उसमें 3 करोड़ से ज्यादा किसान बीमा के दायरे में हैं। ऐसे ही 2010-11 में शुरू की गई संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत 75 लाख किसानों को बीमा के दायरे में लाया गया है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मानसून अभी तक सामान्य से 25 फीसदी कम रहा है। जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा में मानसून की इससे भी खराब स्थिति है। जिसे देखते हुए फसल बीमा का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों की पहुंचाने की कवायद हैै।