गैस आधारित पावर प्लांटों को राहत देने के लिए हाल में ऊर्जा मंत्रालय द्वारा की ग्रई कवायद से पता चलता है कि अगर गैस आधारित प्लांटों को कोयला आधारित प्लांटों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सब्सिडी मुहैया कराई जाती है तो इससे सरकार के खजाने पर 56,149 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
जून, 2014 में की गई इस कवायद के तहत घरेलू गैस को आयातित आरएलएनजी को गैस आधारित पावर प्लांटों को 50 फीसदी प्लांट लोड फैक्टर के साथ चलाने के लिए सब्सिडी से पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव की गणना की गई। सब्सिडी की गणना अगस्त 2014 से मार्च 2016 तक सांकेतिक टैरिफ 5.50 प्रति यूनिट पर की गई। इस अवधि के लिए कुल सब्सिडी 20,773 करोड़ रुपये आई।
इसके लिए गैस की कुल जरूरत 52.31 एमएमएससीएमडी मानी गई। यह माना गया कि गैस नान एपीएम आधारित प्लांटों के लिए पूल्ड प्राइस 13.22 डॉलर प्रति यूनिट और एपीएम आधारित प्लांटों के लिए 10.48 डॉलर प्रति यूनिट पर खरीदी जाएगी। यह पहली बार नहीं है कि जब सरकार गैस आधारित पावर प्लांटों को राहत देने और इनको कोयला आधारित प्लांटों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सब्सिडी देने की संभावनाएं तलाश रही है।
इससे पहले अक्टूबर, 2013 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ( सीसीईए) ने गैस आधारित प्लांटों को पूल्ड गैस प्राइस पर सब्सिडी मुहैया कराने की मंजूरी कैबिनेट से हासिल करने के लिए एक नोट भेजा था। उस नोट के मुताबिक सब्सिडी देने से 28,216 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ने का आकलन किया गया था।
तत्कालीन वित्त मंत्री ने इतने बड़े पैमाने पर सब्सिडी को देखते हुए इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था। स्पष्ट है कि बिजली की दर 5.5 रुपये प्रति यूनिट पर रखने के लिए गैस आधारित पावर प्लांटों को सब्सिडी मुहैया कराने से सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार एक बार फिर गैस आधारित प्लांटों की मदद करने के लिए स्कीम की संभावनाएं तलाश रही है।
मोदी सरकार को इस स्कीम को लागू करने के लिए बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। फरवरी,2014 प्रस्ताव के अनुसार सब्सिडी स्कीम में शामिल किए गए गैस आधारित प्लांट ऐसे प्लांट हैं जो 10,382 मेगावॉट क्षमता के साथ एपीएम गैस पर निर्भर है।
सब्सिडी वास्तविक बिजली की दर और 2014 -15 के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट और 2015-16 के लिए 5.50 रुपये प्रति यूनिट में अंतर के आधार पर तय की गई है। अब यह एनडीए सरकार पर है कि कि वह गैस आधारित पावर प्लांटों को सब्सिडी पैकेज देकर उत्पादन शुरू कराए या उनको गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल जाने दे।