ऊर्जा क्षेत्र में कोयले की किल्लत को दूर करने के लिए कमर कस चुकी केंद्र सरकार देश में कोयले की मुख्य आपूर्तिकर्ता कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का प्रदर्शन सुधारने के लिए जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनी केपीएमजी की सेवाएं लेगी। सरकार ने केपीएमजी को सीआईएल का ऑडिट कर कंपनी का हाल सुधारने के लिए उपाय सुझाने को कहा है। सरकार की ओर से यह कदम 2019 तक कोल इंडिया के सालाना उत्पादन को एक अरब टन के स्तर तक ले जाने के लक्ष्य का पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मामले से जुड़े सूत्रों का बताना है कि केपीएमजी इसपर काम शुरू कर चुकी है। इस क्रम में उसके अधिकारी सीआईएल की सहायक कंपनियों के अधिकारियों से मिलकर कोल इंडिया की खानों और खदानों के आधुनिकीकरण के उपायों पर चर्चा करके इसपर सुझावों को जानने का प्रयास कर चुके हैं। सरकार ने केपीएमजी को सीआईएल की खानों के तकनीकी उन्नयन पर भी रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
केपीएमजी के मुताबिक कोल इंडिया की सहायक कंपनियों के आला अधिकारी कंपनी के आधुनिकीकरण के कुछ सुझावों को मंजूर कर लिया है, जबकि कुछ सुझावों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि यह उनकी कंपनी पर लागू नहीं होते। केपीएमजी ने तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए सीआईएल की सहायक कंपनियों डब्ल्यूसीएल, एसईसीएल और एमसीएल की कोयला खानों का चुनाव कर लिया है। अन्य सहायक कंपनियों की खानों के चुनाव के लिए वह जल्द ही इन कंपनियों से संपर्क करेगी।
केपीएमजी द्वारा सीआईएल की अन्य खानों के आधुनिकीकरण के आगे के अध्ययन के लिए सीआईएल की सहायक कंपनियों को अन्य खानों को अध्ययन के लिए उपलब्ध कराना होगा। अध्ययन में अन्य कोयला खानों को शामिल करने को लेकर सीआईएल ने सहायक कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी नामित कर दिया है, जिन्हें इन खानों की सूची उपलब्ध करानी होगी।
केपीएमजी फिलहाल 70 कोयला खानों के आधुनिकीकरण को लेकर अध्ययन कर रही है। उसने अध्ययन में अन्य कोयला खानों को शामिल करने पर सरकार की ओर से उसे मिलने वाली रकम में बढ़ोतरी करने को भी कहा है, क्योंकि मूल योजना में 70 कोयला खानों के अध्ययन का काम ही शामिल है। कोयला मंत्रालय के सचिव का कहना है कि इस पर सहायक कंपनियों की ओर से अध्ययन की जाने वाली नई खानों की सूची मिल जाने के बाद विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले दिनों कोल इंडिया के आधुनिकीकरण को लेकर हुई एक बैठक में कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने ऐसी खानों को लेकर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश करने को कहा था, जिनका आकार बढ़ाया जाना है। उन्होंने सीआईएल से यह देखकर बताने को कहा था कि आकार के लिहाज से उत्पादन पर महत्वपूर्ण असर डालने वाली कोयला खानें उसकी तिमाही प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) में शामिल हैं या नहीं? गोयल ने कहा था कि आधुनिकीकरण के सुझाव के मद्देनजर केवल उन्हीं खानों की सूची तैयार की जाए, जो सीआईएल की क्यूपीआर के दायरे में नहीं आती हैं।