नई दवा नीति के तहत आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार आधारित तय करने के मंत्रियों के समूह के फैसले पर वित्त मंत्रालय ने ऐतराज जताया है। इसकी वजह से नई दवा नीति को आठ नवंबर को हुई कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। ऐसे में अब एक बार फिर शरद पवार की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह की बैठक शुक्रवार को होगी।
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने दवाओं की कीमतें लागत के आधार पर तय करने की वकालत की है। साथ ही यह भी कहा है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है ऐसे में इस पर राज्य सरकारों की भी राय लेना जरूरी है। इसके पहले आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में गठित किए गए मंत्रियों के समूह (जीओएम) बाजार आधारित फार्मूले की सिफारिश की थी। इसके तहत आवश्यक दवाओं की कीमतें बाजार में एक फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली सभी दवाओं की औसत कीमत के आधार पर तय की जानी थी।
हालांकि इस फार्मूले पर गैर सरकारी संगठनों का पहले से ही मानना था कि प्रस्तावित फार्मूले से दवाओं की कीमतें कम होने के बजाए बढ़ेंगी। ऐसे में लागत आधारित फार्मूला जारी रखना चाहिए। नई दवा नीति के तहत सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा दवाओं की कीमत नियंत्रण के दायरे में आ जाएं। नई नीति के जरिए कंपनियों की इन दवाओं पर कीमतें तय करने की मनमानी कम हो सकेगी। इंडस्ट्री के अनुसार बाजार आधारित फार्मूले से 30 फीसदी दवाएं इसके तहत आ सकती हैं।