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अक्षय तृतीया पर लुभाएगा सोना, समझ कर करें खरीदारी

Thu, 09 May 2013 12:09 AM IST
आशुतोष ओझा/नई दिल्ली
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सरकार सोने का आयात कम करने और लोगों में इसके प्रति आकर्षण घटाने की चाहे कितनी ही कोशिशें कर ले, लेकिन सोना भारतीयों के दिलो-दिमाग से नहीं निकलने वाला है।
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सोना देश में निवेश से अधिक परंपरा से जुड़ा है। यही वजह है कि अक्षय तृतीया (13 मई) जैसे मौकों पर सोने की खरीद में जबर्दस्त उछाल आता है। लेकिन इस बात माहौल कुछ अलग सा है।

नहीं कम हुआ सोने का आकर्षण
सोने में आई जबरदस्त गिरावट के बाद सोने के ग्राहक निवेश से पहले यह जानना चाहते हैं कि सोने की खरीदारी फायदेमंद होगी या फिर इसमें और भी गिरावट की आशंका है। बाजार चाहे जैसा भी हो, पर पुरानी परंपरा के चलते देश में सोने के प्रति आकर्षण फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा है।
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हालांकि बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार विश्लेषकों और निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की खरीद में फिलहाल सतर्कता भरा रवैया अपनाना ही ठीक होगा, क्योंकि ग्लोबल ट्रेंड को देखते हुए आगे चल कर कीमतें गिरने की आशंका को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

अक्षय तृतीया पर ज्यादा होती खरीदारी
गीतांजलि एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव अग्रवाल का कहना है कि पिछले दस सालों में अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी का चलन काफी अधिक बढ़ा है।

पिछले कुछ सालों की बात करें, तो अक्षय तृतीया पर सभी फॉर्मेट में सोने की खरीद करीब 40 टन तक पहुंच जाती है। इस साल भी खरीदारी का माहौल काफी मुफीद है। सोने की कीमतें पिछले साल के मुकाबले निचले स्तर पर हैं।

ज्वेलरी की मांग अधिक
अग्रवाल ने बताया कि ग्राहकों के मूड की बात करें, तो भाव के नीचे आने से ज्वलेरी की खरीद बढ़ी है। लोगों का रुझान सिक्कों या अन्य फॉर्मेट की बजाय ज्वेलरी की ओर ज्यादा है।

जहां तक सोने के आयात को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की बात है, तो रेगुलेशन से अधिक लाभ होता नहीं दिख रहा है। इंडस्ट्री को उलटा इससे नुकसान ही हो रहा है।

सोने के आयात पर सख्ती
सरकार की चालू खाता घाटे को लेकर चिंता जायज है, लेकिन उसके लिए सिर्फ सोने के आयात पर सख्ती ही काफी नहीं है।

लोगों को महंगाई दर के मुकाबले निवेश के अन्य विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। लोग दाम बढ़ने की आशंका में भी खरीदारी करते हैं।

बाजार के लिहाज से देखें, तो आने वाले समय में सोने में निवेश की मांग एक निश्चित लेवल पर आ सकती है, लेकिन ज्वेलरी की मांग बनी रहेगी। पिछले तीन साल में सोने की निवेश मांग औसतन 300-350 टन तक पहुंच चुकी है।

रेलीगेयर रिटेल ब्रोकरेज की एवीपी एंड इंजार्च मेटल, एनर्जी, करेंसी रिसर्च सुगंधा सचदेवा का कहना है कि इस साल भी 13 मई को अक्षय तृतीया पर खरीदारी तेज रहने की उम्मीद है।

सोने की कीमतें पिछले साल अक्तूबर के 32,400 रुपये प्रति दस ग्राम के शीर्ष स्तर से करीब 16 फीसदी तक नीचे आ गई है। यह खरीदारी बढ़ने के लिए एक सबसे सकारात्मक पक्ष है, पिछले कुछ सप्ताह में मांग 12 माह की औसत मांग की तुलना में पांच गुनी बढ़ गई है।

गोल्ड ईटीएफ को भी तरजीह
लोग फिजिकल गोल्ड के साथ गोल्ड ईटीएफ को भी तरजीह दे रहे हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मुताबिक अक्षय तृतीया पर 2012 में गोल्ड ईटीएफ में 6.08 अरब रुपये का कारोबार हुआ, जो 2011 के मुकाबले 44 फीसदी अधिक रहा।

सचदेवा का कहना है कि गोल्ड फर्म व कंपनियां इस अवसर को भुनाने की हर कोशिश कर रही हैं। कंपनियां सोने और ज्वेलरी उत्पादों पर छूट दे रही हैं। सोने के सिक्कों पर मेकिंग चार्ज में कमी या पूरी तरह छूट की पेशकश कर रही हैं।

नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड ने इस साल अक्षय तृतीया के लिए ई-गोल्ड, ई-सिल्वर और ई-प्लेनिटम पर स्पेशल ऑफर पेश किया है।

शादी-ब्याह का भी खास रोल
दूसरी ओर, मोतीलाल ओसवाल कमोडिटीज के एसोसिएट डायरेक्टर हेड कमोडिटी एंड करेंसी किशोर नार्ने का कहना है कि किसी एक खास दिन पर सोने की खरीदारी का कोई टेक्निकल या फंडामेंटल कारण नहीं दिखाई दे रहा है।

सोने की कीमतों में खरीदारी सीजन जैसे त्योहारी या शादी-ब्याह का खास रोल रहता है। मई के वैवाहिक सीजन के बाद सोने की कीमतों में नरमी के संकेत हैं।

अक्षय तृतीया जैसे मौके पर देश में सोने की खरीदारी पारंपरिक कारणों से अधिक रहती है। सोने की अधिकांश खरीदारी लंबे समय के निवेश के दृष्टिकोण से की जाती है। लोगों का नजरिया लांग टर्म में महंगाई के लिहाज से अधिक रिर्टन हासिल करने का रहता है।
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