दिसंबर के अंत तक भारत का राजकोषीय घाटा 5.31 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान को पार कर गया है। इसकी वजह से सरकार वित्त वर्ष 2014-15 के शेष समय में उसे सकल घरेलू उत्पाद के 4.1 फीसदी पर रोकने के लिए कड़े कदम उठा सकती है।
महालेखा परीक्षक द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसंबर की अवधि में राजकोषीय घाटा 5.22 लाख करोड़ रुपये या 2014-15 के अनुमान का 100.2 फीसदी था। राजस्व संग्रह में कमी के कारण ऐसा हुआ है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बार बार दोहराया है कि सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी पर रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजकोषीय घाटे का यह पिछले सात वर्ष का सबसे निचला स्तर होगा। जेटली ने दावा किया है कि सरकार ने इसके लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार के खर्च और राजस्व में अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं।