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बड़े सुधार चाहते हैं बैंक, बीमा सेक्टर

Wed, 02 Jul 2014 10:52 AM IST
प्रशांत श्रीवास्तव/अमर उजाला दिल्ली
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तीस साल बाद पूर्ण बहुमत से बनी सरकार से वित्तीय क्षेत्र, बजट में सख्त कदम उठाने की भी उम्मीद कर रहा है। खास तौर पर उनकी यह उम्मीद तब और बढ़ गई, जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़वी दवा की बात कही। दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) का सामना कर रही बैंकिंग इंडस्ट्री को सरकार से अटके प्रोजेक्ट के रिवाइवल और पूंजी जुटाने के लिए रोडमैप की उम्मीद है। पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यदि बजट में सरकार उद्योगों की रफ्तार बढ़ाने के लिए कदम उठाती है, तो बैंकों के लिए अपने एनपीए की रिकवरी करना न केवल आसान हो सकेगा, बल्कि मांग बढ़ने से नए कर्ज की रफ्तार भी बढ़ेगी। इसका सकारात्मक असर उद्योग जगत से लेकर हाउसिंग सेक्टर, शिक्षा क्षेत्र सभी पर होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के लिए लंबी अवधि के इंफ्रा बांड जारी करने की जरूरतसरकारी बैंकों को सरकार से बेसल-3 मानकों के आधार पर पूंजी सहायता का रोडमैप पेश करने की उम्मीद है। इसी तरह बड़े प्रोजेक्ट (500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा) की प्रभावी निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने के लिए लंबी अवधि की फंडिंग आदि का रोडमैप भी आगामी बजट में होने की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र कर रहा है। कारोबार में गिरावट से जूझ रहे बीमा क्षेत्र के अच्छे दिन लाने के लिए इंडस्ट्री एफडीआई सीमा बढ़ाने, निवेश प्रोत्साहन और डीटीसी, जीएसटी पर सकारात्मक कदम उठाने की उम्मीद कर रही है।बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने व निवेश में तेजी के लिए आयकर छूट बढ़ाने की मांगएचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के एमडी और सीईओ अमिताभ चौधरी के अनुसार मजूबत सरकार को देखतेे हुए हमे लंबे समय से अटके बीमा विधेयक को अमल में आने की उम्मीद हैं। चौधरी के अनुसार बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की जरूरत है। इसके साथ ही जीएसटी और डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) का भी बजट में रोडमैप पेश होने की उम्मीद है। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ राजेश सूद के अनुसार आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार देश में बचत लगातार घट रही है। ऐसे में 80 सी के तहत टैक्स छूट सीमा में बढ़ोतरी होनी चाहिए। लंबी अवधि का निवेश बढ़ाने के लिए अलग से पेंशन और जीवन बीमा के लिए आयकर छूट की कैटेगरी बनाए जाने की जरूरत है। इसके अलावा जीवन बीमा पॉलिसी पर लगने वाले सर्विस टैक्स को भी नए सिरे से देखने की जरूरत है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के एसोसिएशन एफआईडीसी के डायरेक्टर रमन अग्रवाल के अनुसार आरबीआई के वर्किंग ग्रुप ने बैंकों के समान एनबीएफसी पर भी टैक्स लगाने की बात कही थी। आगामी बजट में हमें इन सुझावों को लागू होने की उम्मीद है। साथ ही अर्थव्यवस्था में तेजी लाने वाले कदम की घोषणा की उम्मीद है। जिससे कि एनबीएफसी सेक्टर को बढ़ावा मिल सके।
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