दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ सेवा और निवेश पर भारत के व्यापार समझौते पर जल्द मुहर लग सकती है। वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव राजीव खेर ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह होने जा रहे भारत-आसियान सम्मेलन से पहले समझौते पर सहमति बन जाएगी। खेर का कहना है कि ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, बस कुछ बिंदुओं को सुलझाना बाकी है।
आगामी 20 दिसंबर से दिल्ली में शुरू होने जा रहे भारत-आसियान सम्मेलन की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस दौरान सिंगापुर और मलेशिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर भी सहमति बन सकती है। इस सम्मेलन से पहले 18 दिसंबर को फिक्की की ओर से तीन दिवसीय भारत-आसियान व्यापार मेले का आयोजन किया जाएगा।
दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भारत का सबसे ज्यादा कारोबार इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम के साथ होता है। पिछले साल आसियान देशों के साथ वस्तुओं के मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद सेवा और निवेश क्षेत्र में भी इस प्रकार के समझौते के लिए बातचीत चल रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-12 के दौरान आसियान देशों के साथ भारत का व्यापार 38 फीसदी बढ़कर 80 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
श्रीलंका पर दबाव बना सकती हैं सरकार
श्रीलंका सरकार की ओर से वाहनों के आयात पर बढ़ाए गए शुल्क के मुद्दे पर राजीव खेर का कहना है कि आयात शुल्क घटाने के लिए सरकार राजनयिक कोशिशें करने पर विचार कर सकती है। हाल ही में श्रीलंका सरकार ने वाहनों पर आयात शुल्क दोगुना बढ़ा दिया है, जिसकी मार भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों पर पड़ रही है।