सोने के आयात शुल्क में दो फीसदी का इजाफा करके इसके आयात को हतोत्साहित करने की सरकार की योजना सफल हो सकती है। जानकारों का कहना है कि ऊंचे आयात शुल्क से सोने के सालाना आयात में दस से पंद्रह फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।
आयात शुल्क में बढ़ोतरी से इसकी कीमतों में 600 रुपये प्रति दस ग्राम तक बढ़ोतरी संभावित है। लेकिन ऊंची कीमतों का इसकी खरीददारी पर ज्यादा असर नहीं होगा। सोमवार को सोने के हाजिर और वायदा कारोबार में 200 रु से 315 रुपये प्रति दस ग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। फरवरी वायदा में सोने का दाम 30,800 रुपये और हाजिर में सोना दाम 30,847 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ।
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अंजनी सिन्हा ने बताया कि वित्तमंत्री पी चिदंबरम का शुल्क बढ़ाकर सोने के आयात को हतोत्साहित करने का उद्देश्य सफल हो सकता है और इसके चलते इसकी कीमतें भी ऊंची होंगी लेकिन खरीदारी पर ज्यादा असर नहीं होगा। खासकर निवेश के लिए खरीद करने वालों पर।
उन्होंने बताया कि आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा के बाद हाजिर और वायदा में सोने के दाम 200 से 315 रुपये तक बढ़ चुके हैं। चूंकि वायदा कारोबार मे सोने के दाम पहले से ही 300 रुपये तक ऊंचे चल रहे थे। इसलिए दो फीसदी आयात शुल्क बढ़ने के बाद कीमतों में सिर्फ 250 रुपये तक की ही बढ़ोतरी हुई है।
इंफोलाइन के असिस्टेंड वाइस प्रेसीडेंट बजरूद्दीन खान का कहना है कि सोने का आयात शुल्क चार फीसदी से बढ़ाकर छह फीसदी करने से सोना और महंगा होना तय है। महंगे सोने का असर इसके आयात पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि सोने के सालाना आयात में दस से पंद्रह फीसदी गिरावट आ सकती है।
उन्होंने बताया कि ऊंची कीमतों के चलते खरीददार कम वजन के आभूषण खरीदकर अपनी जरूरत को पूरा करेंगे। दिल्ली बुलियन एंड ज्वेलर्स वेलफेयर के अध्यक्ष विमल गोयल के मुताबिक आयात शुल्क बढ़ाने का असर सोने के कारोबार पर नहीं होगा क्योंकि सरकार ने इसकी घोषणा पंद्रह दिन पहले ही कर दी थी। इससे न सिर्फ आयातक बल्कि कारोबारी भी आयात शुल्क बढ़ना तय मान रहे थे। आभूषण निर्माताओं की मांग पर भी इसका खास असर नहीं होगा। ऐसी संभावना है।