अब आपको क्रेडिट कार्ड के भुगतान को नकद या चेक से करने पर किसी तरह को कोई शुल्क बैंक को नहीं देना होगा। वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक बैंकों को अक्तूबर 2012 में दिए गए इस निर्देश को वापस ले लिया है। बैंकों के तरफ से दबाव पड़ने पर वित्त मंत्रालय ने यह कदम उठाया है।
इसके पहले अक्तूबर 2012 में वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पत्र लिखकर कहा था कि वह नेट बैंकिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड के बिल भुगतान पर शुल्क ले। यानी यदि कोई ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नकद या चेक के रुप में करता है, तो बैंक उससे शुल्क लें।
विभाग ने अपने पत्र में इस संबंध में निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक का हवाला देते हुए कहा था कि बैंक ने इस तरह के भुगतान पर शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया है। पत्र के अनुसार इस तरह के कदम से ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट, ईसीएस, कार्ड ट्रांसफर, एटीएम आदि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के तरीकों को अपनाएंगे।
अक्तूबर में दिए गए आदेश के बाद अब विभाग ने यह निर्देश वापस ले लिया है। इस संबंध में एक सार्वजनिक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अक्तूबर में दिए निर्देश को वापस ले लिया गया है। क्रेडिट कार्ड के बिल भुगतान को नकद या चेक के जरिए देने पर कोई शुल्क अब ग्राहकों को नहीं देना होगा।
सार्वजनिक बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सार्वजनिक बैंकों की इस निर्देश में पहले से ही ज्यादा रुचि नहीं थी। उनका कहना था कि सार्वजनिक बैंक निजी बैंकों की तुलना में अलग हैं। वह निजी बैंकों को तुलना में कहीं कम सेवा शुल्क लेते हैं। ऐसे में इस तरह के कदम से ग्राहकों की प्रतिक्रिया अच्छी नहीं होने वाली थी, जिसे देखते हुए बैंक इसे लागू करने पर बहुत सक्रिय नहीं थे।